देहरादून। सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद नजूल नीति 2009 प्रभावी होती है तो इससे 12 साल पुराने सर्किल रेट पर जमीनें फ्री होल्ड हो सकेंगी। दरअसल, 2009 नीति के तहत बड़ी संख्या में आवेदन हुए थे। बाद में हाईकोर्ट के आदेश की वजह से यह प्रक्रिया ठप हो गई थी।
सरकार ने 2009 नजूल नीति जब जारी की तो उस वक्त प्रावधान किया गया था कि 2009 के सर्किल रेट के हिसाब से ही नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में कई जिलों में लोगों ने इसके लिए आवेदन भी कर दिया। इसके बाद वाद दायर हुआ तो मामला लटकता चला गया। फाइलें ठप हो गईं। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उसी 12 साल पुराने सर्किल रेट के आधार पर आवेदन करने वालों को राहत मिलने की राह भी आसान हो गई है। हालांकि, शहरी विकास एवं आवास मंत्री बंशीधर भगत का कहना है कि कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने बाद इसी विधानसभा सत्र में इसका अध्यादेश लाया जाएगा।
भाजपा के लिए है बड़ा चुनावी मुद्दा
नजूल भूमि को कब्जेधारकों के लिए फ्री होल्ड करने का मामला भाजपा के लिए पहले से ही चुनावी मुद्दा रहा है। लिहाजा, अपनी हर सरकार में भाजपा इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाती रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा को बड़ी राहत और मौका मिला है। निश्चित तौर पर भाजपा इस दिशा में कदम बढ़ाने की रणनीति तैयार कर चुकी है।
डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को लाभ
नजूल नीति से रुकावट हटने के बाद करीब पौने चार लाख हेक्टेयर भूमि फ्री होल्ड हो सकेगी। 1.50 लाख के करीब लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। खासतौर से अल्मोड़ा, हल्द्वानी, रुद्रपुर, रुड़की, ऋषिकेश, देहरादून जैसे शहरों में लोगों को नजूल
की भूमि पर अधिकार मिलेगा।
नजूल भूमि पर पास होंगे नक्शे
अब रोक हटने के बाद नजूल की भूमि से जुड़े तमाम तरह के विवादों का निपटारा आसान जाएगा। इसके साथ ही इस भूमि पर नक्शे भी पास हो सकेंगे। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से इन जमीनों पर बैंक लोन लेकर भी निर्माण कर सकेंगे।
कुमाऊं में बड़ा मुद्दा है नजूल भूमि
कुमाऊं के कई जिलों में नजूल भूमि का मुद्दा हर चुनाव में प्रमुखता से उठता आया है। इस बार भी यह मुद्दा जोर पकड़ने लगा था।
