सहारनपुर। जनपद में सेब की बागवानी का प्रयोग सफल साबित हो रहा है। जिले के दो प्रगतिशील बागवानों ने प्रयोग के तौर पर सेब की हरिमन-99 प्रजाति के पौधे लगाए थे। सेब के इन पांच वर्षीय पौधों पर अच्छी फलत होना शुरू हो गई है। एक पौधे पर करीब 15 से 18 किलो फल आ रहे हैं। इस प्रयोग के सफल रहने से जिले के बागवानों के लिए सेब की बागवानी का विकल्प खुल गया है।
जिले को आम, लीची और अमरूद की बागवानी के लिए जाना जाता है। – कई वर्ष पहले जिले के गांव तीतरों के बागवान राजकुमार चौधरी और नानौता के वसीउल हसन ने आने यहां सेब के पौधे लगाए थे। ट्रायल के तौर पर लगाए गए इन पौधों पर पिछले दो वर्षों से फल आना शुरू हो गए हैं। बागवान वसीउल हसन ने बताया कि ट्रायल के सफल होने से साफ हो गया कि जनपद में सेब की अच्छी बागवानी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि उनके यहां सौ पौधे हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से लाकर लगाए गए थे। इनमें 75 पर इस समय 15 से 18 किलो प्रति पेड़ फल आ रहा है। शेष 25 पौधे विभिन्न कारणों से खराब हो गए थे। जिले के किसान सेब को लीची और आम के बागों में सहफसली के तौर पर भी लगा सकते हैं। जिले में जून के मध्य सेव की फसल पकती है। इस समय कश्मीर और हिमाचल का सेब मंडी में नहीं आता। इससे इस सेब के मंडी में भाव भी बढ़िया मिलते हैं। इस प्रजाति के फल का औसत वजन 150 से 200 ग्राम रहता है।
जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह कहते हैं कि जिले के दो बागवानों से सेब की हरिमन-99 प्रजाति लगा रखी है। अभी इन पर फल आना भी शुरू हो गया है। इस सेब का स्वाद और रंग बढ़िया रहा तो जिले के बागवानों के लिए एक नया विकल्प खुल जाएगा। जिससे जनपद में सेब का रकबा भी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

