Political Crisis झारखंड में भाजपा बनाएगी सरकार, तैयारियां पूरी

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झारखंड में Political Crisis के बीच झामुमो ने अपने विधायकों को हैदराबाद भेजा

रांची। Political Crisis in Jharkhand झारखंड में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक संकट बढ़ गया है। चंपाई सोरेन को राज्यपाल ने अभी सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। ऐसे में अटकलें तेज हो गई हैं कि कहीं झारखंड में अगली सरकार भाजपा की तो नहीं बनने जा रही है।

इस चर्चा को बल तब मिला जब झामुमो ने अपने पांच विधायकों को छोड़कर सभी को विशेष विमान से हैदारबाद भेज दिया। उसे पार्टी में टूट का डर सता रहा है। हालांकि पार्टी नेता अभी कुछ कहने से बच रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वहां झामुमो के चंपाई सोरेन सरकार बनाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

आइए पहले झारखंड में सीटों का गणित समझ लेते हैं। झारखंड राज्य में कुल 81 सीट है। जिसमें से किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 41 विधायकों की आवश्यकता है। मौजूदा हालात में किसी के पास भी बहुमत नहीं है। झामुमो ने कांग्रेस और अन्य दलों को मिलाकर सरकार बनाई थी। झारखंड में झामुमो के 29, भाजपा के 26 बाबूलाल को मिलाकर, कांग्रेस के 17 प्रदीप यादव को मिलाकर, आजसू 3, सीपीआई माले 1, एनसीपी 1, राजद 1, निर्दलीय 2 और रिक्त एक है। ऐसे में कांग्रेस बड़ा गेम चेंजर है। Political Crisis के बीच यदि झामुमो और कांग्रेस में टूट होती है तो भाजपा आसानी से वहां सरकार बना लेगी।

दरअसल जमीन घोटाले में ईडी द्वारा हो रही जांच के बाद हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले हेमंत सोरेन ने स्तीफा दिया। सोरेन पहले अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाना चाह रहे थे, लेकिन इससे पार्टी में फूट की स्थिति बन गई । इसके बाद चंपई सोरेन के नाम पर सहमति बनी, लेकिन गुरुवार शाम तक राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाया नहीं था। इसीलिए कयास लगाए जाने लगे कि कहीं वहां भाजपा तो सरकार बनाने की संभावना नहीं तलाश रही है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर उत्साह नहीं दिखा रही है।

हालांकि भाजपा हेमंत सोरेन पर पिछले चार सालों से लगातार हमलावर है। इस हमले को तब और बल मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री और अब ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास ने हेमंत सोरेन पर खान मंत्री रहते पत्थर खनन का पट्टा लेने के दस्तावेज सामने रख दिए। अब शिबू सोरेन के परिवार पर हुई इस कार्रवाई को भाजपा अपने भ्रष्टाचार के लगाए आरोपों पर हुई कार्रवाई बता रही है।

हेमंत सोरेन के साथ राज्य के आदिवासी वोट का बड़ा समूह रहा है। अपने पिता शिबू सोरेन की विरासत को संभाल रहे हेमंत की गिरफ्तारी से आदिवासी समाज में भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। इसी वजह से भाजपा इस गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देने से बच रही है। गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने इंटरनेट मीडिया पर हेमंत सोरेन के खिलाफ मोर्चा खोले रखा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी सोरेन परिवार पर राज्य के संसाधनों की लूट में शामिल होने का आरोप लगाते रहे। उन्होंने इसे आदिवासी युवाओं के हक से जोड़ा और समाज के लिए नुकसानदायक बताया। अब जबकि विपरीत परिस्थिति आई है तो भाजपा इसको किस हद तक अपने हक में भुनाएगीए यह देखना होगा।

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