आजकल पति-पत्नी का नई शादी के कुछ दिनो बाद किसी छोटे से आपसी विवाद को लेकर अलग हो जाना आम बात हो गयी है ऐसा इसलिए होता है। क्योकि आप दोनो उस छोटे से विवाद को अपनी बेइज्जती समझने की गलती कर बैठते है। जबकि होना यह चाहिए कि आप दोनो को अपने नये रिश्ते को पूरा समय देना चाहिए इसके बाद विवाद के कारण आप दोनो की आपसी बातचीत भी बंद हो जाती है।
जिसका पूरा फायदा पत्नी के मायके वाले ज्यादा और कुछ लड़कों के घरवाले भी आप दोनो के बारे मे झूठी बाते बताकर आप दोनो के बीच गलतफहमी पैदा करते है। क्योकि वो यह नही चाहते कि आप दोनो फिर से एक हो इसके बाद आप दोनो के बीच गलतफहमी पैदा होने से आप दोनो का रिश्ता उलझ जाता है और उसके टूटने की नौबत तक आ जाती है।
अंत मे इसलिए मै यही कहुंगा कि आप दोनो को चाहिए कि आप समझदारी दिखाते हुए आपसी बातचीत से अपना विवाद को सुलझा ले। क्योकि जब भी आप किसी तीसरे को माध्यम बनायेंगे तब आप दोनो के बीच गलतफहमी पैदा होना तय है।
एक बात और जब आप पति-पत्नी साथ रहना चाहते है। तब सीधे एक-दूसरे से बात करने से बेहतर कोई विकल्प नही..वरना तो एक बार कोर्ट कचहरी जाने के बाद तलाक होना निश्चित है। इसलिए प्रयास करें कि बच्चों के खातिर वरना बिना किसी थाने कोर्ट मुकदमों वकीलों के बहकावे में समय पैसा बरबाद करने से बेहतर आपसी सहमति से तलाक लेकर अपनी अलग अलग जिंदगी बिताएं।

लेखक सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं

