लखनऊ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। कांग्रेस की शिकायत पर हुई जांच में पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में हजारों नामों में गड़बड़ी पाई गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा के आदेश पर दो उप जिलाधिकारियों को मुख्यालय संबद्ध किया गया है, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं और पूरे प्रदेश में मतदाता सूचियों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
मामले की शुरुआत कांग्रेस के आरोपों से हुई, जिसमें कहा गया था कि करीब 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए या गलत दर्ज किए गए। कुल अनियमितताओं का आंकड़ा लगभग 16,554 तक बताया जा रहा है। जांच में ईपिक नंबर सर्च करने पर एक मतदाता का विवरण दूसरे व्यक्ति के नाम पर दिखने जैसी गंभीर खामियां सामने आईं। इन गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद आयोग ने तुरंत एक्शन लिया।पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को लापरवाही का दोषी पाते हुए जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही ईआरओ और वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गड़बड़ियों को तुरंत सुधारा जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। विशेष सारांश पुनरीक्षण-2027 की प्रक्रिया चल रही है और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होनी है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।यह मामला विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे वोटर लिस्ट संबंधी आरोपों के बीच सामने आया है। आयोग का रुख साफ है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। पीलीभीत प्रशासन को अब सुधार प्रक्रिया तेज करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटनाक्रम ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
