उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में बैंक प्रबंधन ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। बैंक प्रशासन ने करेंसी चेस्ट और पीएनबी शाखा से जुड़े 14 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए उनका स्थानांतरण दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस पूरे घोटाले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।
मामले की शुरुआत 29 अगस्त को हुई थी जब नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने कोतवाली सदर बाजार में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में जाली नोटों की राशि 7 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन गहन गणना के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों की मौजूदगी ने बैंकिंग सुरक्षा और आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था, लेकिन 3 सितंबर को एनआईए ने इस केस को अपने हाथों में ले लिया। एनआईए अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें बैंक प्रबंधक अमित कुमार, चालक आदेश चौधरी, मुकेश कुमार, राजेंद्र कुमार, नीटू, अजय कुमार और हरीश रौंटा शामिल हैं। हालांकि, नामजद आरोपी सुशील कुमार और मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे अभी भी फरार हैं और एनआईए की पकड़ से बाहर हैं।
बैंक सूत्रों के अनुसार, जिन 14 कर्मचारियों का तबादला किया गया है, वे लंबे समय से इस शाखा और करेंसी चेस्ट से जुड़े थे। हालांकि एलडीएम नवनीत शर्मा ने इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्रवाई सर्किल कार्यालय या मेरठ मुख्यालय स्तर से की गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट बैंक के भीतर कैसे पहुंचे और इनका मुख्य स्रोत क्या है।
