मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के सख्त नियमों के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया। इस योजना में शहरी, अर्धशहरी क्षेत्रों के साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वैज्ञानिक निस्तारण, पुनर्चक्रण और निगरानी प्रणाली को लागू करने का प्रावधान है।
मुख्य सचिव के नेतृत्व में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई। साथ ही स्वच्छ उत्तराखंड मिशन 2026‑2030 की कार्ययोजना और विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
पर्यटन स्थलों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल तैयार करने की बात कही गई, जिसमें शहरी निकाय, ग्राम पंचायत और अन्य संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गईं। निजी संस्थानों, औद्योगिक संगठनों और बड़े कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए भी स्पष्ट नियम और जवाबदेही निर्धारित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में कचरे की निगरानी, चालान कार्रवाई, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) और डिजिटल पोर्टल पर डेटा दर्ज करने जैसे प्रावधानों पर विशेष जोर दिया गया। लैंडफिल पर जाने वाले कचरे की मात्रा घटाने और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक निस्तारण पर बल दिया गया।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को प्रशिक्षण, नियमित निगरानी और कचरा पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन तथा प्रसंस्करण की व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। प्रस्तावित कार्ययोजना और नियमावली को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया, जिसमें सचिव नितेश झा, रणवीर सिंह चौहान सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।
