68 साल पहले टाटा एयरलाइंस को जवाहरलाल नेहरू द्वारा कब्जाने की एक कहानी

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देश में 55 साल से अधिक समय तक राज करने वाली कांग्रेस के बड़े-बड़े कारनामों की पोल खुल रही है। कॉन्ग्रेस और उसके चमचो ने जो सच्चाई जनता से छुपा कर रखी थी वह धीरे-धीरे सामने आ रही है। सबसे पहले कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू, उसके बाद इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने देश को कितना नुकसान पहुंचाया। इसकी सच्चाई धीरे-धीरे उजागर हो रही है। इसी कड़ी में 68 साल पहले जवाहरलाल नेहरू द्वारा कब्जा ली गई टाटा एयरलाइंस का भी मुद्दा गरमाया हुआ है, जिसे अब टाटा ने वापस खरीद लिया है आजकल यह बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसलिए हम आज आपको उस सच्चाई के कुछ महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा रहे हैं खबर को पूरा पढ़ने के बाद पाठक इसकी सच्चाई को काफी हद तक हम उनसे सकेंगे।

68 साल पहले टाटा से कांग्रेस ने एयर इंडिया को लूट लिया था
जबरदस्ती जवाहरलाल नेहरू ने टाटा को उनकी टाटा एयरलाइंस, जिसका बाद में टाटा ने नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया था, उसे भारत सरकार को देने को कहा। जब टाटा ने अपनी एयरलाइन देने से मना किया तब एक विधेयक लाकर टाटा से जहाज, सारा स्टाफ और कंपनी यहां तक कि कंपनी के खाते में पड़ी समस्त रकम के साथ एयर इंडिया और टाटा एयरलाइंस को टाटा से छीन लिया गया। यानी लूट लिया गया। सिर्फ इसलिए ताकि सरकार के मंत्री लूट खसोट कर सकें।

यह लूट और फिर बाद में इंदिरा गांधी द्वारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण के बाद से पूरे विश्व में भारत बदनाम हो गया था। तब यह माहौल बन गया था और भारत में बिजनेस का माहौल नहीं है। भारत में इन्वेस्टमेंट करने लायक नहीं हैं। और फिर भारत एकदम से पिछड़ गया। सरकारी बद्इंतजामी, कमीशन बाज़ी, लूट खसोट ने एयर इंडिया को अरबों रुपये के घाटे में ला दिया।

कर्मचारियों को कई सालों से सैलरी नहीं मिल सकी। कई जगह पर इसकी इमारतें को बैंकों ने नीलाम कर दिया। यहां तक कि कई बैंकों ने हवाई जहाज नीलाम करके अपने पैसे वसूले। अब 68 साल बाद टाटा ने अपनी लूटी हुई कम्पनी को सरकार से पैसे देकर व वापस ले लिया है। बधाई रतन टाटा जी को।

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