असम सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी जमीयत उलमा

Maulana Arshad Madani s

सहारनपुर। जमीयत उलमा.ए.हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत असम फॉरेन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। मदनी का कहना है कि असम में मुसलमानों के खिलाफ कानून के दोहरे मापदंड का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि असम राज्य में मुसलमानों के खिलाफ क्रूर सरकारी उत्पीड़न का दुष्चक्र जोरों पर है। इसी के तहत 28 असहाय मुसलमानों को जिनमें महिलाएं भी शामिल हैंए फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर जबरन डिटेंशन कैंपों में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का ईमानदारी से पालन किए बिना एकतरफा फैसला सुनाना और फिर उसे जबरन डिटेंशन कैंप भेज देना एक अमानवीय कार्य है।

आरोप लगाया कि असम राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से यही सब कुछ हो रहा है। मौलाना मदनी ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 लोगों को एक पक्षीय आदेश द्वारा विदेशी घोषित किया गया है। उन्हें ट्रिब्यूनल के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं दिया गया। दूसरी ओर इस प्रकार के मामलों में जो गैर.मुस्लिम हैं। उनके लिए औपचारिक रुप से एक अधिसूचना जारी करके सीएए के अंतर्गत नागरिकता देने की बात कही गई। कहा कि जमीयत उलमा.ए. हिंद इस मामले को मानवता के आधार पर लड़ेगी और लोगों को इंसाफ दिलाने का काम करेगी।

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