अमेरिका के बाद अब ईरान भी करेगा तगड़ा पलटवार, तैयारियां पूरी

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तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान और इसराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका ने इस टकराव में हस्तक्षेप करते हुए ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका ने ईरान के सबसे सुरक्षित परमाणु केंद्र ‘फ़ोर्दो’ पर 13,600 किलोग्राम वज़नी ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर’ बम गिराया। इसके साथ ही नतांज़ और इस्फ़हान में स्थित अन्य परमाणु सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया।

हमलों के बाद ट्रंप ने इन ठिकानों को “पूरी तरह नष्ट” घोषित किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ईरान ने पलटवार किया तो अमेरिका और अधिक “विनाशकारी” कार्रवाई करेगा।

ईरान की सख़्त प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका को चेताया कि अगर वह युद्ध में उतरता है, तो उसे “अपूरणीय क्षति” उठानी पड़ेगी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि अमेरिका को अपने इस हमले का पछतावा होगा। उन्होंने अमेरिका के मिडिल ईस्ट स्थित सैन्य अड्डों की सूची भी सार्वजनिक की है जिन्हें मिसाइल हमलों से निशाना बनाया जा सकता है।

अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर खतरा

ईरान की चेतावनी के बाद अमेरिका के इराक, क़तर, बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद सैन्य ठिकाने हाई अलर्ट पर हैं। इनमें क़तर का अल-उदैद एयरबेस और बहरीन का नौसैनिक अड्डा भी शामिल है, जहां अमेरिका का पांचवां बेड़ा तैनात है।

होर्मुज़ स्ट्रेट पर संकट की आशंका

ईरान की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की धमकी भी सामने आई है। यह दुनिया के तेल व्यापार का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग 20% ट्रांज़िट होता है। इसे बंद करने के लिए ईरान क्रूज़ मिसाइल, बारूदी सुरंगें और हमलावर नौकाएं तैनात कर सकता है।

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद करने से ईरान को भी नुकसान होगा, खासकर उसके सबसे बड़े तेल ग्राहक चीन के साथ व्यापार पर असर पड़ेगा।

क्षेत्रीय युद्ध की आशंका

ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस हमले का जवाब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रखेगा। सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकाने और तेल टर्मिनल्स भी संभावित निशाने पर हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

पृष्ठभूमि: कासिम सुलेमानी की हत्या और पुराने जख्म

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन पहले भी ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी की बगदाद में हत्या कर चुका है, जिसके बाद ईरान ने अल असद एयरबेस पर मिसाइल हमले किए थे। हालांकि उस समय ईरान ने अमेरिका को पहले ही चेतावनी दे दी थी, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ था।

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