लखनऊ l लखनऊ पुलिस ने एक बड़ी साइबर ठगी का खुलासा करते हुए 16 अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जरिए लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने गिरोह के पास से ₹1.07 करोड़ नकद, 54 मोबाइल, 3 लैपटॉप, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक और नकदी गिनने की मशीनें जब्त की हैं।
इस गिरोह ने लोटस गेमिंग नाम की फर्जी बेटिंग साइट बनाकर लोगों को ठगा है। आरोपी छत्तीसगढ़ और गुजरात के रहने वाले जानकीपुरम के फ्लैट्स में रहकर ठगी का धंधा चला रहे थे । ₹10 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी में शामिल, क्रिप्टो करेंसी के जरिए रकम विदेश भेजते थे। पुलिस ने दो फ्लैट्स से भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस और फर्जी दस्तावेज जब्त किए है। गिरोह छह महीने से ऑपरेशन चला रहा था। यह लोग खुद को स्टूडेंट बताकर फ्लैट किराए पर लिए थे। पुलिस ने गैंग पकड़ने वाली टीम को ₹1 लाख का इनाम घोषित किया है।
लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार क्षेत्र स्थित स्मृति अपार्टमेंट के दो फ्लैट्स—A-403 और A-904—से 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 12 आरोपी छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से जबकि 4 आरोपी गुजरात के निवासी हैं। ये सभी खुद को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का छात्र बताकर फ्लैट में रह रहे थे। डीसीपी नॉर्थ की सर्विलांस टीम को इन फ्लैट्स में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी, जिसके बाद एसआई अमरनाथ चौरसिया और थाना प्रभारी प्रभातेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में दबिश दी गई।
ठगी का तरीका:
आरोपियों ने एक फर्जी बेटिंग वेबसाइट “लोटस गेमिंग” तैयार की थी, जिसमें लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा खेलने के लिए प्रेरित किया जाता था।
- लोग वॉलेट में पैसे डालते थे, जो बाद में रेंट अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए जाते थे।
- फिर ATM या ऑनलाइन माध्यम से नकदी निकाली जाती थी।
- ठगी की राशि को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था, जिसमें जालसाज अपना कमीशन (10-20%) काटते थे।
बरामद सामग्री:
पुलिस को तलाशी के दौरान:
- ₹1.07 करोड़ नकद
- 3 लैपटॉप
- 54 मोबाइल
- 2 नोट गिनने की मशीनें
- 79 एटीएम कार्ड
- 22 पासबुक, 13 चेकबुक
- 13 फर्जी आधार कार्ड
- पुराने सिक्के और नोट जो टोकन के रूप में उपयोग होते थे
रेंट अकाउंट और फर्जी दस्तावेज का नेटवर्क:
गिरोह ने 75 से ज्यादा फर्जी बैंक अकाउंट्स स्थानीय लोगों और अन्य राज्यों के नाम पर खुलवाए थे, जिन्हें रेंट अकाउंट कहा जाता है। पुलिस अब ऐसे खाताधारकों और फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले साइबर कैफे संचालकों की भी जांच कर रही है।
फ्लैट मालिकों की लापरवाही उजागर:
- फ्लैट A-403 मुरादाबाद निवासी अरुण पुष्पेंद्र और A-904 अलीगंज निवासी एडवोकेट अब्बास जैदी का है।
- दोनों ने पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया और आरोपियों ने खुद को छात्र बताकर फ्लैट किराए पर ले लिए थे।
- स्थानीय निवासी विकास सिंह के अनुसार, पुलिस वेरिफिकेशन की मांग कई बार की गई थी।
विदेशी आकाओं से कनेक्शन:
थाना प्रभारी के अनुसार, इस गिरोह के सरगना विदेश में बैठे हैं, और उनके संपर्क में रहने के लिए क्रिप्टो वॉलेट और विदेशी नंबर इस्तेमाल किए जा रहे थे।

