भारत में भी फेसबुक फरेब, भ्रामक खबरें और हिंसा फैलाने का माध्यम बन गया है। कंपनी की एक अंदरूनी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। भारत उसके लिए विश्व का सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन खामियां सुधारने के लिए उठाए उसके कदम, लोगों की जान की कीमत पर महज प्रयोग से ज्यादा कुछ नहीं हैं। इन भ्रामक पोस्ट का दुष्प्रभाव भारत और चुनाव प्रक्रिया पर भी हो रहा है। ये खामियां कैसे दूर होंगी। यह सब उसे खुद भी पता नहीं है। यहां तक कि खुद बिगाड़े इन हालात को सुधारने के लिए उसने उचित संख्या में स्टाफ या संसाधन भी नहीं रखे और इसके लिए पैसा खर्च करना वह बेकार मानता है।
‘विरोधात्मक और नुकसानदेह नेटवर्क
भारत एक केस स्टडी’ नामक इस दस्तावेज को कंपनी के ही अध्ययनकर्ताओं ने तैयार किया है। इसके अनुसार फेसबुक पर ऐसे कई ग्रुप व पेज चल रहे हैं, जो मुसलमानों व समाज के कमजोर तबकों के खिलाफ काम कर रहे हैं। फेसबुक के अवैध कार्यों की जानकारी दे रही यह रिपोर्ट उसकी पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस यूगन ने फेसबुक के कई अहम दस्तावेज के साथ तैयार की है। 2019 के आम चुनाव के बाद भी भारत पर ऐसी ही रिपोर्ट में फेसबुक द्वारा झूठी खबरें फैलाने व व्यवस्था बिगाड़ने की पुष्टि हुई। उसके अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा देखे गए कंटेंट के 40 फीसदी व्यू फर्जी थे। वहीं 3 करोड़ भारतीयों तक पहुंच रखने वाला अकाउंट, अनधिकृत मिला।
फेसबुक की सनसनीखेज अंदरूनी रिपोर्ट के अनुसार उसके पास अपने सबसे बड़े बाजार भारत के लिए इतने संसाधन नहीं हैं और न ही वह इस पर खर्च करना चाहता है, ताकि खुद उसी द्वारा पैदा की झूठ, भ्रामक खबरें और हिंसा फैलाने की समस्या दूर कर सके। फेसबुक के प्रवक्ता एंडी स्टोन सामग्री को इस साल 50 प्रतिशत कम किया है, दूसरी ओर मानते हैं कि भारत में वंचित समुदायों व मुसलमानों के खिलाफ उसके प्लेटफॉर्म से नफरत बढ़ाई जा रही है। कोरोना महामारी को भी नहीं छोड़ा। दस्तावेज के अनुसार जुकरबर्ग ने अपने प्लेटफॉर्म को ‘अर्थपूर्ण सामाजिक संवाद’ पर केंद्रित रखने के लिए कदम उठाए। लेकिन इनके जरिये भारत के बारे में झूठी खबरें व सूचनाएं ही फैलाई गई। यहां तक कोरोना महामारी को भी नहीं बख्शा गया।

