नई दिल्ली । तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक‑प्लस ने अपनी वर्चुअल बैठक में दिसंबर 2026 के लिए सितंबर 2026 के उत्पादन कोटा को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। इस कदम का आधार वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण था। बैठक में सात प्रमुख सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। इन देशों ने सहमति जताई कि मौजूदा कोटा को बनाए रखना आपूर्ति‑संतुलन को स्थिर रखने में मदद करेगा और कीमतों में अस्थिरता को रोक सकता है।
वर्चुअल सत्र में बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले महीनों में तेल की कीमतें कई कारकों से प्रभावित हुई हैं, जैसे कि आर्थिक मंदी की आशंकाएँ, भू‑राजनीतिक तनाव और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती मांग। इन परिस्थितियों को देखते हुए, ओपेक‑प्लस ने यह तय किया कि उत्पादन में कोई कटौती या वृद्धि न करके मौजूदा स्तर को बरकरार रखा जाए। इस निर्णय से वैश्विक तेल आपूर्ति में अचानक गिरावट या वृद्धि की संभावना कम होगी, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों को स्थिरता मिल सकेगी।
साथ ही, समूह ने भविष्य में संभावित बाजार बदलावों के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। यह तंत्र सदस्य देशों को उत्पादन स्तर में आवश्यकतानुसार शीघ्र समायोजन करने की अनुमति देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लचीलापन नीति तेल बाजार की अनिश्चितताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ओपेक‑प्लस के इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों ने सकारात्मक रूप से सराहा है और कहा है कि यह विश्व आर्थिक पुनरुद्धार के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करता है। आगे भी समूह की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएँगी, ताकि उत्पादन कोटा को बाजार की वास्तविक स्थितियों के अनुसार समायोजित किया जा सके।
