हैदराबाद। हाथ में डिग्री पर नौकरी नहीं…ये कहानी दुनिया के 80 करोड़ युवाओं की होने वाली है. यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की हालिया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. इसके अनुसार, आने वाले 15 साल में वैश्विक स्तर पर लगभग 120 करोड़ युवा अपनी एजुकेशन पूरी करके रोजगार की तलाश में श्रम बाजार में एंट्री करेंगे. जिसमें से केवल 40 करोड़ युवा ही रोजगार पा सकेंगे.
भारत, जहां औसत उम्र 18-25 साल है, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक होने का अनुमान है. इसी कड़ी में विभिन्न रिसर्च एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार, भारत में अगले 15 साल में करीब 18 करोड़ नए प्रोफेशनल्स तैयार होंगे जो नौकरी की तलाश में निकलेंगे, लेकिन उनमें से हर चौथा युवा बेरोजगार ही रह जाएगा. UN की रिपोर्ट में क्या है: सबसे पहले जानते हैं कि यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की ताजा अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में क्या चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, अगले 15 वर्षों में भारत सहित दुनिया के विकासशील देशों 120 करोड़ युवा अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में जुटेंगे. इसमें से केवल 40 करोड़ युवाओं के लिए ही नौकरियां उपलब्ध हो पाएंगी, जिससे 80 करोड़ युवा बेरोजगार रह जाएंगे. बैंगकॉक में वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ (IMF) की वार्षिक बैठक में यूएनडीपी के प्रशासक ने इसे पूरी दुनिया के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ यानी चेतावनी बताया है.
80 करोड़ युवा बेरोजगार क्यों रह जाएंगे: UN की ओर से चेतावनी जारी होने के बाद सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या है जिसकी वजह से 80 करोड़ युवा बेरोजगार रह जाएंगे? संयुक्त राष्ट्र ने इसकी वजह भी बताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों में युवाओं की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है. भारत समेत दुनिया के विकासशील देशों में औसत आयु महज 18 से 25 वर्ष के बीच है, जिससे वर्कफोर्स में आने वालों की संख्या अनियंत्रित रूप से बड़ी हो गई है.
यूएनडीपी का ये अनुमान तकनीकी स्थिति के आधार पर है. यूएनडीपी ने स्पष्ट किया कि यह कमजोर सरकारी नीतियों का नतीजा है. दरअसल, विकासशील देश अपनी कुल आय का औसतन 9.5 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च कर रहे हैं. इसके चलते सरकारों के पास रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए बजट की कमी हो गई है.
15 साल में भारत के 18 करोड़ युवा जॉब मार्केट में कूदेंगे: वैश्विक रिसर्च एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले 15 साल में भारत के 12 से 18 करोड़ युवा अपनी पढ़ाई पूरी करके जॉब मार्केट में आएंगे. मौजूदा संकट के चलते इनमें से 10 से 13.5 करोड़ युवाओं को किसी न किसी रूप में रोजगार मिलने का अनुमान है, जबकि करीब 2 से 4.5 करोड़ युवा गंभीर रोजगार संकट का सामना करेंगे.
यानी, इनके बेरोजगार रहने का अनुमान है. हालांकि, सरकार ने एजेंसियों के निष्कर्षों का खंडन किया है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, सिटीग्रुप की रिपोर्ट में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और आरबीआई के केएलईएमएस डेटा पर विचार नहीं किया गया, जो रोजगार के पर्याप्त अवसरों को दर्शाते हैं.
मोदी सरकार ने वैश्विक रिपोर्ट को किया खारिज: केंद्र की मोदी सरकार ने इस वैश्विक रिपोर्ट के अनुमानों को खारिज किया है. श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि विदेशी या वैश्विक एजेंसियां देश के व्यापक आधिकारिक डेटा को पूरी तरह शामिल नहीं करती हैं. जबकि, RBI का KLEMS और PLFS के डेटा के अनुसार, देश ने पिछले 6-7 वर्षों में श्रम बाजार में करीब 17 करोड़ नए रोजगार जोड़े हैं, जो यह साबित करता है कि भारतीय बाजार में नौकरियां पैदा हो रही हैं. 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई कर रहे और ना ही नौकरी: इस संकट के बीच नीति आयोग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट एक दूसरे पहलू को दिखाती है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में 8.7 करोड़ ऐसे युवा हैं जो NEET (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में हैं. यानी, ये युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं और ना ही कोई हुनर सीख रहे हैं. साथ ही इनके पास कोई रोजगार भी नहीं है. यदि इन्हें जल्द ही कौशल नहीं सिखाया गया, तो आने वाले 15 साल में बेरोजगारों की यह फौज और बड़ी हो सकती है.
बेरोजगारी कम करने के लिए सरकार क्या कर रही: बेरोजगारी कम करने के लिए सरकार ने बजट और आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं. रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं. इसके तहत, ईपीएफओ (EPFO) जुड़ने वाले नए कर्मचारियों को सरकार सीधे उनके बैंक खाते में एक महीने की सैलरी (न्यूनतम ₹15,000 तक) तीन किश्तों में दे रही है. यह योजना उन नियोक्ताओं (Employers) को प्रोत्साहित करती है जो नई भर्तियां करने से कतराते हैं. इसके जरिए सरकार हर साल लाखों युवाओं को लेबरफोर्स का हिस्सा बना रही है.
स्किल गैप कम करने के लिए पेड इंटर्नशिप: देश के टॉप 500 कॉर्पोरेट घरानों में हर साल युवाओं को 12 महीने की पेड इंटर्नशिप दी जा रही है. इसमें युवाओं को ₹5,000 प्रति माह का स्टाइपेंड मिलता है. यह योजना ‘स्किल गैप’ (Skill Gap) की समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई.
इसका उल्लेख UNDP और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में भी किया गया है. इस स्कीम से युवाओं को कंपनियों में काम करने का अनुभव मिल रहा है, जिससे उनकी कामकाज की एबिलिटी में सुधर हो रहा है.
नेशनल करियर सर्विस कंपनी और बेरोजगारों को एक मंच पर ला रही: नेशनल करियर सर्विस एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो नौकरी चाहने वालों को कंपनियों से जोड़ता है. आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के डेटा के अनुसार, इस पोर्टल पर 2.3 करोड़ से अधिक वैकेंसीज को कंपनियों ने लिस्ट किया है. इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से ज्यादा अनौपचारिक श्रमिकों को पंजीकृत कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है.

