कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान इलाके में दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसा 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे भारी बारिश के दौरान हुआ। अचानक उमड़ी भीड़ और अव्यवस्थित निकासी के कारण अफरा-तफरी मच गई। मृतकों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक बताई जा रही है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। उनके इलाज का पूरा खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री ने हादसे की जांच कराने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सात आरोपी गिरफ्तार, जांच तेज

ताजा अपडेट के मुताबिक, कोलकाता पुलिस ने मामले में पूजा समिति के पदाधिकारियों, भीड़ नियंत्रण से जुड़े कर्मचारियों और निजी सुरक्षा कर्मियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। जांच में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और निकासी के इंतजामों में संभावित खामियों की पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज भी जांचे जा रहे हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बारिश शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग पंडाल में पहुंचने लगे। पहले से मौजूद भीड़ के बीच अचानक दबाव बढ़ा और लोग गिरने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने पर्याप्त स्वयंसेवकों और सुरक्षा इंतजामों की कमी का आरोप लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता घोषित की है। राज्य सरकार ने पंडाल के आसपास भीड़ जुटने पर रोक लगाई है और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है।

ममता बनर्जी ने जताया दुख

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। हादसे के बाद पंडाल को आम लोगों के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चोरबागान का यह पूजा पंडाल 90 साल से अधिक पुराना है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस हादसे ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।