देहरादून । जोशीमठ के पहाड़ी क्षेत्र में शनिवार को एक हेलीकॉप्टर का गंभीर दुर्घटनाग्रस्त होना सामने आया, जिसमें सभी छह सवारों की जान चली गई। दुर्घटना के बाद तुरंत रेस्क्यू कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर मृतकों के शवों को सुरक्षित करने की कोशिश शुरू की। अंधेरे और घने जंगलों के कारण रास्ता अत्यंत दुर्गम था, जिससे प्रारंभिक ऑपरेशन को रोकना पड़ा।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि दुर्घटना स्थल मुख्य सड़क से लगभग दस से बारह किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए टीमों को घने वन और खड़ी पहाड़ियों का सामना करना पड़ता है। इस कठिन भूभाग में शवों को उठाना और उन्हें सड़क तक ले जाना दोनों ही कार्य अत्यधिक श्रमसाध्य हैं।

शनिवार की सुबह, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवानों ने पुनः स्थल पर पहुंचकर एक व्यवस्थित अभियान शुरू किया। उन्होंने विशेष उपकरणों और हेलीकॉप्टर की मदद से शवों को सुरक्षित करने की योजना बनायी, परन्तु घने जंगल और पहाड़ी रास्ते की कठिनाई ने कार्य को और जटिल बना दिया।

शवों की स्थिति अत्यंत बुरी बताई गई; दुर्घटना के कारण वे क्षत‑विक्षत अवस्था में थे, जिससे उन्हें संभालना और भी कठिन हो गया। रेस्क्यू दलों को इन शरीरों को दुर्गम पहाड़ी मार्ग से नीचे लाने में कई घंटे लग गए, और कई बार उन्हें अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

प्रशासन ने बताया कि अब शवों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से देहरादून तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है, ताकि परिवारों को शीघ्रता से सूचना दी जा सके। इस बीच, स्थानीय लोग और मीडिया इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की पड़ताल कर रही हैं।

जांच के प्रारम्भिक चरण में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी या मौसम की स्थिति ने दुर्घटना को प्रेरित किया। अधिकारियों ने कहा कि सभी साक्ष्य एकत्रित कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोका जा सके।