पंजाब के बाद उत्तराखंड चुनाव में भी दलित कार्ड खेल सकती है कांग्रेस

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देहरादून। पंजाब में दलित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद अब कांग्रेस उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में दलित कार्ड खेल सकती है। पंजाब कांग्रेस के में प्रभारी हरीश रावत ने इसके साफ संकेत दिए हैं। पंजाब में दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाकर उत्तराखंड लौटे हरीश रावत ने पार्टी की परिवर्तन यात्रा की जनसभा में कहा कि मां गंगा प्रार्थना है कि मेरे जीवन में भी ऐसा क्षण आए जब उत्तराखंड से एक गरीब शिल्पकार के बेटे को इस राज्य का मुख्यमंत्री देख सकूं। इससे हरीश रावत के इरादे साफ हो गए कि कांग्रेस उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में पंजाब में चले दलित कार्ड भरपूर इस्तेमाल करेगी।

हरीश रावत ने दिए संकेत लक्सर में परिवर्तन यात्रा के दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि मैं मां गंगा प्रार्थना करता हूं कि मेरे जीवन भी ऐसा क्षण आए जब उत्तराखंड से एक गरीब शिल्पकार के बेटे को इस राज्य मुख्यमंत्री देख सकूं। हम उसके लिए काम करेंगे। दलित वर्ग कितना हमारे साथ है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्पूर्ण यह है कि उन्होंने कितने वर्षों तक कांग्रेस सहारा देकर केंद्र और राज्यों में सत्ता में पहुंचाने का काम किया। हम प्रतिदान देंगे। अवसर मिला तो उनकी आकांक्षाओं के साथ कांग्रेस चलेगी।

साढ़े 18 फीसदी से अधिक है दलित आबादी

उत्तराखंड राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 18.50 फीसदी से अधिक है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में अनुसूचित जाति जनसंख्या
18,92,516 है।

दून, हरिद्वार और यूएसनगर में सबसे ज्यादा आबादी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड के 11 पर्वतीय जिलों में 10.14 8.78 लाख है। सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी हरिद्वार जिले में 411274 है।

लाख है। जबकि तीन मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में

मैदान में बसपा की झोली में जाता रहा उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए तीन विधानसभा चुनाव

में दलित वोट बैंक पर बहुजन समाज पार्टी ने भी सेंध लगाई। 2007 में पार्टी 11.76 प्रतिशत वोट हासिल कर आठ, 2012 में 12.28 प्रतिशत वोट के साथ तीन सीटें बसपा ने जीती थीं। लेकिन 2017 में उसका वोट बैंक खिसक कर 7.04 प्रतिशत रह गया और उसकी सीटों का खाता भी नहीं खुल सका। यूएसनगर में भी बसपा दलित आबादी के दम पर ही चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है।

यशपाल आर्य के जाने के बाद कांग्रेस में बड़ा दलित चेहरा नहीं सियासी जानकारों का मानना है कि बेशक 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दलित कार्ड से चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने का मंसूबा रखती हो, लेकिन उसके पास फिलहाल कोई बड़ा दलित चेहरा नहीं है। कद्दावर राजनेता यशपाल आर्य के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस में बड़े दलित नेता का खालीपन अब तक बना हुआ है। दलित नेता के तौर पर उसके पास कुछ चेहरे तो हैं, लेकिन उनका इतना बड़ा कद नहीं है कि पार्टी उन पर दांव लगा सके।

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