जानिए आखिर क्यों बदला गया फेसबुक की पेरेंट कंपनी का नाम

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आभासी दुनिया को एक बड़ा प्लेट फार्म देने वाली न्यू वर्ल्ड आर्डर की पहली बड़ी कम्पनी हाल ही में लॉन्च की गई है। जो आने वाले समय में वर्चुअल वर्ल्ड में बहुत कुछ बदल देने वाली है, जिसके तहत फेसबुक इंक कंपनी को अब मेटावर्स के नाम से जाना जाएगा। इसमें यह नहीं मान लें कि फेसबुक का नाम बदल दिया गया है। असल में इसमें केवल फेसबुक की प्रबंधन कम्पनी का नाम बदला गया है। अब कुछ लोग यह सोच रहे होंगे कि आखिर इस नाम फेसबुक में क्या बुरा है, जो उसे नया नाम क्यों दिया जा रहा है। दरअसल, मेटावर्स कंपनी है जिसके अंदर फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और कंपनी के दूसरे प्लेटफॉर्म आते हैं। जैसे कि गूगल की मालिक अल्फाबेट कम्पनी है। ऐसी कंपनियों को पेरेंट कंपनी कहा जाता है।

फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग की निगाह भविष्य पर गड़ी हुई है। इंटरनेट का भविष्य वह मेटावर्स में देख रहे हैं। यह बिलकुल एक नयी दुनिया होगी जो कहने को तो आभासी होगी लेकिन जितना समय गुजरता जाएगा आभासी दुनिया ही वास्तविक बनती जाएगी। जिसमे आप न सिर्फ जिंदा लोगो से बात कर पाएंगे बल्कि अपने मृत परिजनों से भी बात कर पाएंगे।

बता दें कि बिल गेट्स की कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल एक नई चैटबोट का पेटेंट कराया है। कंपनी का दावा है कि इस चैटबोट के जरिए आप मरे हुए लोगों से बातचीत कर सकते हैं। दरअसल, माइक्रोसॉफ्ट को एक ऐसे चैटबोट के लिए पेटेंट दिया गया है जो मरे हुए दोस्त, रिश्तेदार, अजनबी और सेलेब्रिटी से बातचीत करने में सक्षम है। इस चैटबोट में मरे हुए लोगों के सोशल प्रोफाइल से डेटा लिया जाएगा। उनके इस मौजूदा डेटा के आधार पर चैटबोट का प्रोग्राम तैयार होगा। मरे हुए लोगों से बातचीत इसी पर आधारित होगी।

इस तरह के चैटबोट प्रोग्राम मेटावर्स की ही तैयारी है। आप सोच भी नही सकते है कि इन टेक जायन्ट्स कम्पनियो ने आपके भविष्य को अपने कंट्रोल में करने के लिए किस कदर तैयारियां कर ली है। क्या क्या पेटेंट करा लिए है। फिलहाल आप मेटावर्स को ही ठीक से समझ लीजिये।

दरअसल, फेसबुक प्रबंधन का मानना है कि अभी मेटावर्स बनने के शुरुआती चरण में है। मेटावर्स को पूरी तरह से विकसित होने में 10 से 15 साल लग सकते हैं। साथ ही ये समझना भी जरूरी है कि मेटावर्स को केवल कोई एक कंपनी मिलकर नहीं बना सकती। ये अलग-अलग टेक्नोलॉजी का बड़ा सा जाल है जिस पर कई कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं।

मेटावर्स एक तरह की आभासी दुनिया है इस टेक्नीक से आप वर्चुअल आइंडेंटिटी के जरिए डिजिटल वर्ल्ड में एंटर कर सकेंगे। यानी एक पैरेलल वर्ल्ड जहां आपकी अलग पहचान होगी। उस पैरेलल वर्ल्ड में आप घूमने, सामान खरीदने से लेकर, इस दुनिया में ही अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से मिल सकेंगे।

मेटावर्स ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी कई टेक्नोलॉजी के कॉम्बिनेशन पर काम करता है।

अगर आप आने वाले न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ओर मेटावर्स की परिकल्पना को ओर भी बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं तो ब्लैक मिरर नाम की वेबसीरीज देख लीजिए इसके पाँच सीजन है इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि हर एपिसोड की कहानी बिल्कुल अलग है यह नेटफ्लिक्स पर हिंदी सबटाइटल के साथ भी उपलब्ध है।

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