पटना। पटना के गांधी मैदान में 2013 में नरेंद्र मोदी की चुनावी हुंकार रैली में हुए सिलसिलेवार धमाकों में एनआईए की विशेष अदालत ने नौ दोषियों में से चार को फांसी की सजा सुनाई है। अन्य पांच में से दो को उम्रकैद, दो को 10-10 साल और एक को 7 साल की सजा सुनाई है। जबकि, एक अन्य आरोपी यूपी के फखरुद्दीन को निर्दोष पाते हुए कोर्ट ने रिहा कर दिया था।
वह आठ साल तक जेल में बंद था। एनआईए के विशेष जज गुरविंदर सिंह मेहरोत्रा ने 27 अक्तूबर को 9 लोगों को दोषी ठहराया था। जांच एजेंसी की ओर से केस की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक ललन प्रसाद सिंह ने बताया कि हैदर अली, नोमान अंसारी, मोहम्मद मुजीबुल्ला अंसारी और इम्तियाज आलम को फांसी की सजा सुनाई गई है। उ
न्होंने बताया कि अदालत ने निर्दोष लोगों के जमावड़े में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की उम्मीद में किए गए इन धमाकों पर कठोर रुख अपनाया है। दो अन्य दोषियों उमर सिद्दिकी और अजहरुद्दीन कुरैशी ने सुनवाई के दौरान मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली थी। अपराध स्वीकारोक्ति को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उन्हें फांसी के बदले उम्रकैद की सजा सुनाई। शेष तीन में से अहमद हुसैन और मोहम्मद फिरोज असलम को दस-दस साल, जबकि इफ्तिखार आलम को सात साल की सजा सुनाई गई है। इफ्तिखार आलम की सात साल की सजा पूरी हो चुकी है। इस मामले के कई दोषियों पर महाबोधि मंदिर धमाके में भी शामिल होने का आरोप है।

