लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित जिला न्यायालय परिसर के आसपास अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने रविवार को बुलडोजर कार्रवाई की। रेजीडेंसी के पास सड़क, फुटपाथ और नालों पर बने अवैध चैंबरों तथा दुकानों को हटाने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। कार्रवाई का वकीलों ने विरोध किया और मौके पर नारेबाजी भी की। इसके बावजूद नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रखी।

यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देशों के अनुपालन में की गई। नगर निगम ने पहले सर्वे कर जिला न्यायालय और आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण वाले स्थानों को चिह्नित किया था। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 211 चैंबरों को चिन्हित किया गया था। इन निर्माणों को हटाने के लिए पहले 11 अक्टूबर को कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन आपत्तियों के निस्तारण और अदालत में अपील लंबित होने के कारण इसे टाल दिया गया था।

इस मामले में इससे पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। 17 मई 2026 को हाईकोर्ट के निर्देश पर चिह्नित 72 अतिक्रमणों में से 14 को हटाया गया था। इसके बाद 30 अगस्त को नगर निगम की टीम ने दोबारा अभियान चलाकर कुछ दुकानों और चैंबरों को ध्वस्त किया था।

वहीं, हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 10 सितंबर को शेष अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने प्रशासन को पांच सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने को कहा था। साथ ही संबंधित कब्जेदारों को अपने निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने या स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर देने के निर्देश भी दिए गए थे।

रविवार को कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर व्यवस्था संभाली। वकीलों के विरोध के बीच अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहा। इस कार्रवाई के बाद न्यायालय परिसर के आसपास अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।