सहारनपुर। सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 70 साल पुरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शनिवार सुबह शुरू कर दी गई। इस काम में छह बुलडोजर लगाए गए थे। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कलक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट सील कर दिए और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। मौके पर आरएएफ समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। कई बड़े मुस्लिम नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। कैराना सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोक दिया गया है। पूरे जिले में तनाव का माहौल है।
मस्जिद को हटाने की कार्रवाई 2 सितंबर 2026 को जिला जज की अदालत से आए फैसले के बाद हुई है। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से 16 जुलाई को दिए गए आदेश को बरकरार रखा था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलक्ट्रेट परिसर की 315 वर्ग मीटर जमीन पर बने निर्माण को सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जा माना था। साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया था।
70 साल पुरानी बताई गई मस्जिद
मस्जिद की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों में इसे करीब 70 साल पुरानी मस्जिद बताया गया है। मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में दावा किया गया था कि यह मस्जिद 1947 से पहले से मौजूद है। हालांकि अदालत की कार्यवाही में मस्जिद पक्ष कथित पुराने अस्तित्व और स्वामित्व के समर्थन में ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे का निष्कर्ष माना।
यह विवाद वर्ष 2025 में शिकायत के बाद सामने आया था। इसके बाद राजस्व विभाग की जांच और नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया था। इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में अपील की, लेकिन सितंबर में राहत नहीं मिली।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जुलाई में अदालत के आदेश का विरोध करते हुए कहा था कि मस्जिद अपनी मिलकियत की जमीन पर है और प्रशासन को पहले जमीन पर अपना स्वामित्व साबित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि कलक्ट्रेट परिसर में मंदिर भी मौजूद है और यदि मस्जिद पर कार्रवाई होती है तो भविष्य में मंदिर को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। मसूद ने कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही थी।
वहीं, मस्जिद पक्ष की ओर से भी अदालत के फैसले को चुनौती देने की बात कही गई थी। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब आगे की कानूनी लड़ाई की तैयारी की बात सामने आई है।
प्रशासन की ओर से कार्रवाई को अदालती आदेश के अनुपालन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई बताया गया है। ध्वस्तीकरण के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती का उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना रहा।

