देहरादून । रेसकोर्स स्थित ऑफिसर हॉस्टल के सभागार में देवभूमि विचार मंच द्वारा 'राष्ट्रीय चिंतन तथा ज्ञान के सतत प्रवाह' विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बौद्धिक समागम में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह-संयोजक चंद्रकांत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रज्ञा प्रवाह का प्राथमिक उद्देश्य शोध के माध्यम से समाज को नई दृष्टि प्रदान करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज को सही दिशा दिखाने का उत्तरदायित्व विद्वतजनों का है और उन्हें अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष उपलब्धि के रूप में डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि शरण दीक्षित द्वारा लिखित पुस्तक 'इंडियन नॉलेज सिस्टम एंड इंट्रोडक्शन' का भव्य लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। लोकार्पण के पश्चात उपस्थित विद्वानों ने भारतीय समाज, संस्कृति और वर्तमान समय के ज्वलंत विषयों पर गहन चर्चा की।
समारोह की शुरुआत प्रांत संयोजक डॉ. अंजली वर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. आशा ने किया, जबकि अंत में प्रोफेसर डॉ. रीना चंद्रा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर क्षेत्र संयोजक देवराज सिंह, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन और आरएसएस के विभाग प्रचारक धनंजय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कांडपाल, बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, दर्जा राज्यमंत्री विनोद उनियाल और अनुराधा वालिया ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा देवभूमि विचार मंच के अध्यक्ष पृथ्वीधर काला, कोषाध्यक्ष केसी मिश्रा, गंगा शोध केंद्र के ट्रस्टी विशाल वर्मा और देवकमल के संपादक राजकुमार दक्ष सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। यह आयोजन बौद्धिक विमर्श और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ।
