देहरादून । हरी भरी धरती और सेहतमंद मिट्टी से बेहतर कल के लिए कवायद को विशेषज्ञ जुटे। इस दौरान वेस्ट से वेल्थ बनाने के लिए जनसहभागिता पर फोकस रहा। लोगों को गुर सिखाए गए । करीब एक माह तक भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान मुख्यालय के साथ 8 क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों पर विशेष अभियान 6.0 चलाया गया।

अभियान के दौरान गुच्चूपानी, टपकेश्वर मंदिर, कालियामाली (कोरापुट) और अभेड़ा जैविक उद्यान (कोटा) जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता कार्य किया गया। स्थानीय लोगों को एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया और कम्पोस्टिंग व वर्मी‑कम्पोस्टिंग जैसी तकनीकों से जैविक कचरे को उपयोगी बनाना सिखाया गया। 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत कई पेड़ लगाए गए, जिससे हरित आवरण बढ़ाने में योगदान मिला।

कार्यालयों में भौतिक और ई‑फ़ाइलों की समीक्षा कर अनावश्यक दस्तावेज़ हटाए गए, जिससे कार्यकुशलता में सुधार हुआ। अभियान में सक्रिय भागीदारी करने वाले 'सफाई मित्रों' को सम्मानित किया गया, जिससे जन‑सहभागिता की भावना को प्रोत्साहन मिला। कार्यक्रम के उद्घाटन में नोडल अधिकारी ने विभिन्न प्रभागों की उपलब्धियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, और संस्थान के निदेशक डॉ. शाकिर अली ने सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया। प्लांट साइंस प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. जे.एम.एस. तोमर ने अपने विचार साझा किए, जबकि मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक विज्ञान प्रभाग के प्रमुख डॉ. चरण सिंह ने मार्गदर्शन प्रदान किया। सोशल मीडिया को निरंतर अपडेट रखने वाले अमित चौहान की सराहना भी की गई।

यह अभियान न केवल पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देता है, बल्कि स्थानीय समुदाय को स्वच्छता और सतत विकास की दिशा में सक्रिय बनाता है। आगे भी ऐसी पहलें जारी रखने से हरियाली और स्वच्छता का संदेश पूरे राष्ट्र में फैलाया जा सकेगा। इस