बुलंदशहर/गुलावठी/सिकंदराबाद/खानपुर। यूक्रेन में फंसे जिले पांच और छात्र बृहस्पतिवार को घर पहुंच गए। जिले के अब तक 11 छात्र वापस आ चुके हैं। अभी कई छात्र विभिन्न मुल्कों की सीमाओं पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। घर पहुंचे छात्रों का कहना है कि हर पल दहशत से भरा था। जब वह बस से निकले तो उसके ऊपर से भी फाइटर प्लेन गुजर रहे थे। बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच नौ से 10 घंटे तक उन्हें पैदल चलकर बॉर्डर पार करना पड़ा।
गुलावठी के मोहल्ला बुद्धेखां निवासी मोहम्मद फरहान पुत्र इरफान और मौहम्मद जैद पुत्र सईद ने यूक्रेन से लौटने पर अपनी दास्तां बताई। मोहम्मद फरहान ने बताया कि वह यूक्रेन के विनित्सिया में चारोें ओर धमाके की आवाज गूंज रही थी। वह चार दिन तक वहीं फंसा रहा।

यूनिवर्सिटी ने छात्रों को बस मुहैया कराई और 27 फरवरी को विनित्सिया से निकले। हंगरी बॉर्डर पहुंचने के लिए 14 घंटे बस के सफर के बाद कड़ाके की ठंड में 9 घंटे पैदल चलना पड़ा। तब जाकर हंगरी बॉर्डर पहुंचे। तीन दिन हंगरी में रहे। रात्रि में वह दिल्ली पहुंचे। फरहान का चचेरा भाई मोहम्मद जैद भी यूक्रेन से घर वापस आ गया। जैद भी विनित्सिया से एमबीबीएस कर रहा है। वह 26 फरवरी को यूक्रेन से निकला था। रोमानिया होते हुए वह भारत वापस आया। जैद ने बताया कि यूक्रेन का हर पल डर व खौफ से भरा था।
कई छात्र कर रहे फ्लाइट का इंतजार
सिकंदराबाद तहसील क्षेत्र के नयागांव निवासी छात्र अभिषेक भाटी बुधवार की देर रात घर लौट आया है। अभिषेक भाटी के पिता राजकुमार भाटी सीआरपीएफ से कमांडो के पद से सेवानिवृत्त हैं। अभिषेक ने बताया 24 फरवरी को भारत वापस आने के लिए फ्लाइट की टिकट बुक कराई थी। हमले होने के बाद फ्लाइट कैंसिल हो गई थी।
अभिषेक भाटी 26 फरवरी को बस से 600 किलोमीटर दूर रोमानिया बॉर्डर पर करीब 16 घंटे में पहुंचा। बस ने बॉर्डर से करीब 10 किलोमीटर पहले ही उतार दिया था। जहां से वह साथियों के साथ पैदल ही बॉर्डर तक पहुंचा। रोमानिया में सरकार ने अच्छी सुविधा उपलब्ध कराई। बुधवार को अभिषेक भाटी रात 12 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। नगर निवासी छात्र अनुराग सैनी, आकाश सैनी, मुकुल गोयल अभी भी बॉर्डर पर आश्रय स्थल में हैं। घर वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं।
सायरन बजते ही छूटती थी कंपकंपी
नगर के डीएम रोड स्थित महालक्ष्मी कालोनी में रहने वाले हरिभूषण शर्मा का पुत्र प्रतीक चंद मुद्गल भी घर पहुंच गया। प्रतीक ने बताया कि 26 फरवरी की दोपहर रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। 12 घंटे पैदल चला और बॉर्डर पर दो दिन और एक रात कड़ाके की ठंड में काटी। उसने बताया कि वहां पर तीन बार सायरन बजते थे। पहला सायरन अलर्ट का तो दूसरा बंकर में जाने और तीसरा खतरा न होने का संकेत देता था। जब सायरन बजता तो कंपकंपी बंध जाती थी और वहां से निकलने में भी कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर खानपुर क्षेत्र का छात्र प्रशांत भी घर लौट आया है। घर लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
चाकलेट खाकर ही काट रहे दिन-रात
जिला पंचायत कार्यालय में इंस्पेक्टर राजकुमार की पुत्री इशिता कठारिया ने बताया कि यूक्रेन पार कर हंगरी बॉर्डर पहुंच गई है। अभी तक उसका नंबर घर वापसी के लिए नहीं आया। यहां पर चाकलेट खाकर ही दिन रात बिता रहे हैं। हंगरी बॉर्डर पर यूक्रेन से निकलने वालों की लंबी लाइन लगी हुई।
मुंबई पहुंचा शशांक, ट्रेन से आ रहा दिल्ली
यूक्रेन में फंसा डिबाई कस्बा निवासी शशांक सोनी मुंबई पहुंचने के बाद दिल्ली के लिए ट्रेन में सवार हो गया है। पिता नरेंद्र सोनी ने बताया कि शशांक ने मेसेज कर बताया था कि रोमानिया बॉर्डर पर इतनी ठंड थी कि वहां पर खड़ा होना भी मुश्किल था। यहां से निकलकर ही राहत की सांस ली है।
बंकर से निकलकर होटल में पहुंचा आतिफ
गांव अहार निवासी आतिफ यूक्रेन में बंकर से निकल कर एक होटल में पहुंचने का मेसेज परिजनों को भेजा है। परिजन उसके आने का इंतजार कर रहे हैं। बताया गया कि वह इस समय हंगरी के बुडापेस्ट में होटल में सुरक्षित है।
तीन छात्र अलग-अलग एयरपोर्ट पर कर रहे इंतजार
नरौरा की अणु विहार कॉलोनी निवासी तीनों छात्र यूक्रेन से सकुशल बाहर निकलकर पड़ोसी मुल्कों के बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। जितेंद्र पांडेय ने बताया कि उनका बेटा तुषार पांडेय मंगलवार को रोमानिया बॉर्डर पर गया था। देर रात दिल्ली पहुचंने की संभावना है। छात्रा अदिति ठाकुर बुधवार की रात पोलैंड की राजधानी वारसॉ में पहुच गई है। छात्र विलय कुमार हंगरी के बुडापेस्ट एयरपोर्ट पर है।
बुडापेस्ट के एक चर्च में है यश
यूक्रेन में फंसा स्याना निवासी छात्र हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गया है। जहां उसे साथियों सहित एक चर्च में रहने का स्थान मिला है। स्याना के मेडिकल स्टोर व्यवसायी वीरेन्द्र चौधरी का पुत्र यश भी बुडापेस्ट पहुंच गया है। फिलहाल एक चर्च में ठहरा हुआ है।

