- नैनीताल में नैनी झील का पानी सड़कों पर आया
- भूस्खलन से कई रास्ते बंद
- यात्रियों को अपनी जगह ही रूकने की अपील
देहरादून । उत्तराखंड में बारिश ने एक बार फिर जमकर कहर बरपाया है। बारिश के रौद्र रूप से हुए भूस्खलन में करीब 42 लोगों की जान चली गई। सबसे अधिक मौत नैनीताल जिले में हुई है। यहां करीब 25 लोगों ने दम तोड़ दिया है। मरने वालों में 14 उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर शामिल हैं। बारिश और भूस्खलन से नैनीताल के सभी रास्ते बंद हैं। राज्य में 24 घंटे में 200 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गयी है। कई क्षेत्रों में तो 400 मिमी से भी अधिक बारिश हुई है।

नैनीताल में मॉल रोड और नैनी झील के किनारे पर स्थित नैना देवी का मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ गया है, जबकि भूस्खलन से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। नैनीताल जिला प्रशासन फंसे पर्यटकों की मदद में जुटा है। वहीं शहर में आने वाले और बाहर जाने वाले वाहनों को अलर्ट करने के लिए जगह जगह पुलिस को तैनात किया गया है। यात्रियों से बारिश बंद होने तक ठहरने को कहा जा रहा है। भूस्खलनों से शहर से बाहर जाने का रास्ता अवरुद्ध हो गया है। रामनगर.रानीखेत मार्ग पर लेमन ट्री रिजॉर्ट में करीब 100 लोग फंस गए हैं ।

नैनी झील का जलस्तर बढ़ा
भारी बारिश से नैनीझील ने दो दशक बाद एक बार फिर रौद्र रूप दिखाया है। झील का पानी लोअर माल रोड के ऊपर से बह रहा है। झील का जलस्तर 12 2 फीट को पार कर गया है। राहत की बात है कि मंगलवार को बारिश हल्की होने के बाद झील धीरे.धीरे शांत हो रही है। प्रशासन ने झील के सभी निकासी गेट खोल दिए हैं ।

नैनीताल के जिलाधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल ने बताया कि नैनीताल की ओर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। नैनी झील के किनारे रह रहे लोगों को अलर्ट किया गया है। संबंधित अधिकारियों को मैंने जरूरी दिशा.निर्देश दिए हैं। ये अधिकारी राहत कार्य में जुटे हैं। .

