देहरादून। उत्तराखंड के हर गांव में अब पेयजल की जांच होगी। वहीं, हर ब्लॉक में पानी टेस्टिंग की लैब बनेगी। पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने बताया कि तीन दिन की आपदा में क्षतिग्रस्त हुई 991 पेयजल योजनाओं के लिए 38 करोड़ 15 लाख रुपये बजट भी जिलाधिकारियों को जारी कर दिया गया है।
चुफाल ने बताया कि अभी प्रदेश में पानी की जांच के लिए 27 लैब संचालित हैं। अब हर ब्लॉक में लैब बनाने जा रहे हैं, जो उस ब्लॉक के इंटर कॉलेज में स्थापित की जाएगी। ताकि विज्ञान के छात्र भी इस लैब से सीख सकें। उन्होंने बताया कि सभी गांवों में पांच-पांच लोगों की टीम को प्रशिक्षण दिया गया है। जो कि किट के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता मापेंगे। अगर पानी पीने योग्य नहीं होगा तो दवाईयों का प्रयोग करके उसे ठीक किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत पांच करोड़ से कम के काम तो जिलाधिकारियों के स्तर पर ही किए जा रहे हैं। पांच करोड़ से ऊपर की परियोजनाओं के लिए चंपावत और देहरादून की 100 प्रतिशत डीपीआर तैयार हो चुकी है। रुद्रप्रयाग और हरिद्वार की भी एक-एक डीपीआर बची हुई है। उन्होंने बताया कि 15 दिन के भीतर सभी पांच करोड़ से ऊपर की परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो जाएगी, जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। आपदा में टूटी 991 पेयजल लाइनें
बीते सप्ताह प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा में प्रदेश में 991 पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने बताया कि इन योजनाओं को ठीक करने के लिए 38 करोड़ 15 लाख रुपये की जरूरत है, जिसके लिए सभी जिलाधिकारियों को बजट जारी किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नैनीताल नगर क्षेत्र में अभी भी स्वच्छ पेयजल न आने की शिकायत है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। दो दिन के भीतर ठीक हो जाएगा। जहां पानी खराब आ रहा है या पानी की किल्लत है तो वहां टैंकर से पानी भेजा जा रहा है।

