नैनीताल l उत्तराखंड के सात युवकों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार की कंपनी को बेचने के मामले में चंपावत पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे आरोपी की तलाश जारी है।
पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने सोमवार को चंपावत में इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 10 जुलाई, 2024 को बनबसा के तीन युवकों को म्यांमार में बंधक बनाये जाने का मामला प्रकाश में आया था। बंधक बनाये गये एक युवक ललित सौन के पिता राजेन्द्र सौन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। साथ ही मामला विदेश से जुड़ा होने के कारण भारत सरकार और भारतीय दूतावास से संपर्क साधा गया। भारत सरकार के हस्तक्षेप से कुछ समय पहले म्यांमार में बंधक बनाए गए युवकों को वापस भारत लाया जा चुका है और उन्हें उनके घर भेज दिया गया है।
जांच में पता चला कि म्यांमार में बंधक बनाए गए युवकों में सात युवक उत्तराखंड के हैं। इनमें तीन बनबसा, तीन खटीमा और एक देहरादून का है। युवकों को विदेश में नौकरी का झांसा दिला कर पहले बैंकाक बुलाया गया और प्रति युवक 10000 थाई भाट म्यांमार की कंपनी को बेच दिया गया। साजिश में खटीमा के राहुल उपाध्याय और पोरबंदर गुजरात के टुकड़ा गांव के जय जोशी उर्फ जयदीप रामजी टोकड़िया का नाम प्रकाश में आया। इसके बाद इन्हें म्यांमार ले जाया गया और स्कैमिंग का कार्य करवाया गया। युवकों बंधक बना लिया गया और उन्हें वेतन नहीं दिया गया।
वेतन के नाम पर उनसे मारपीट की गयी। साथ ही वापस भारत भेजने के नाम पर उनसे भारी भरकम धनराशि की मांग की गयी। बनबसा पुलिस आरोपियों पर नजर रखने लगी। इसी बीच पुलिस को पता चला कि जय जोशी गुजरात से आया हुआ है। बनबसा थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह जगवाण की अगुवाई में पुलिस की एक टीम ने उसे 13 सितम्बर को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी को बनबसा ले आयी है।
आरोपी के खिलाफ बनबसा, खटीमा, रायवाला और पोरबंदर में कुल चार मामले दर्ज हैं। आरोप है कि मुख्य आरोपी अन्य राज्यों के युवकों को भी विदेश में नौकरी देने के नाम पर साजिश कर चुके हैं। श्री गणपति के अनुसार सह आरोपी राहुल उपाध्याय निवासी आवास विकास कालोनी, खटीमा, ऊधम सिंह नगर दुबई फरार हो गया है।

