बस्ती। जिले में सरकारी भूमि और तालाबों पर कब्जे की कहानी कोई नई नहीं है, लेकिन चौकड़ी टोल प्लाजा का मामला प्रशासन की लापरवाही का ताजा उदाहरण बन गया है। दरअसल, हरैया तहसील के अंतर्गत चौकड़ी टोल प्लाजा का ऑफिस और सर्विस लेन सरकारी भूमि पर बने तालाब की जमीन पर खड़े हैं।
ग्राम सभा चौकड़ी के गाटा संख्या 232 और 233, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज है, वहां टोल प्लाजा का ऑफिस और अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं। ग्रामीणों ने इसको लेकर जिलाधिकारी बस्ती और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, परियोजना निदेशक अयोध्या से शिकायत की है।
लेखपाल ने भी दी कब्जे की रिपोर्ट
शिकायत के आधार पर प्रशासन ने हल्का लेखपाल को जांच सौंपी थी। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा कि गाटा संख्या 232, 233 पर तालाब की भूमि दर्ज है, जिस पर अवैध कब्जा किया गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही गांव के अधिकांश तालाब या तो पाट दिए गए या अवैध कब्जों में चले गए। अब जब एक बड़े प्रोजेक्ट के तहत टोल प्लाजा बनाया गया, तब भी तालाब की भूमि को नजरंदाज कर दिया गया, जो बेहद चिंताजनक है।
कब होगी कार्रवाई, बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब लेखपाल की रिपोर्ट में अवैध कब्जे की पुष्टि हो चुकी है, तो अब तक प्रशासन ने भूमि खाली कराने की पहल क्यों नहीं की? ग्राम सभा चौकड़ी के ग्रामीणों की मांग है कि तालाब की भूमि तत्काल खाली कराई जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा होने के कारण और भी संवेदनशील माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर टिकी हैं कि कब इस तालाब की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।

