देहरादून। उत्तराखंड में 2022 विधानसभा चुनाव से पहले दल बदल का सिलसिला जारी है। कांग्रेस के दो विधायक तोड़ चुकी भाजपा को अब झटका लगा है। हालांकि यह बात पहले से ही चर्चा में थी। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य सोमवार को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।
आपको बताने की यशपाल सिंह अनुसूचित जाति वर्ग से आते है। वह पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। दरअसल पिछले महा पंजाब में हुए नेतृत्व परिवर्तन में एक दलित को मुख्यमंत्री बनाने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड में वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने घोषणा की थी कि वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में भी कोई दलित मुख्यमंत्री बने। यह उनकी दिली इच्छा है। जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे। जिसमें यशपाल आर्य का नाम सबसे ऊपर था। क्योंकि यशपाल पहले भी कांग्रेस में थे और भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने उन्हें विधायक बनाया और मंत्री पद भी दिया। भाई साहब के बयान के बाद मैं चर्चा चल रही थी कि यशपाल आर्य जल्दी ही कांग्रेस ज्वाइन करेंगे क्योंकि प्रदेश में और कोई दलित नेता नहीं है जो राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने के लालच में यशपाल आर्य वापस कांग्रेस में चले गए हैं।
दिल्ली में कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की उपस्थिति में प्रेस वार्ता में यशपाल और संजीव आर्य ने वापसी की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व सीएम हरीश रावत भी मौजूद रहे।
यशपाल और संजीव आर्य ने 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने तब दोनों को प्रत्याशी भी बनाया था। दोनों ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा सरकार ने यशपाल आर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया।
यशपाल आर्य छह बार विधायक रह चुके हैं। यशपाल पूर्व में उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं। यशपाल आर्य पहली बार 1989 में खटीमा सितारगंज सीट से विधायक बने थे। वह पहले भी काफी समय तक कांग्रेस पार्टी में भी रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस विधायक राजकुमार व प्रीतम सिंह पंवार और निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा ने भाजपा का दामन थामा था।

