हाई कोर्ट की टिप्पणी : श्रीराम के बिना भारत अधूरा,ईश्वर को माने या न माने, लेकिन आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं

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लखनऊ। इंटरनेट मीडिया पर भगवान राम और कृष्ण पर की गई अश्लील टिप्पणी पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि श्री राम के बिना भारत अधूरा है। कोई ईश्वर को माने या नहीं, उसे किसी की आस्था को चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है, कुछ प्रतिबंध भी है। जिस देश में रह रहे हैं, उस देश के महापुरुषों और संस्कृति का सम्मान करना जरूरी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने हाथरस के आकाश जाटव की अर्जी पर दिया है। आरोपी आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश को दोबारा ऐसे अपराध न करने की चेतावनी देते हुए कोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर की है। कोर्ट ने कहा हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की रही है। हम सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मां कश्चित दुःख भाग भवेत की कामना करने वाले लोग हैं।

याची का कहना था कि 28 नवंबर, 2019 को किसी ने उसकी फर्जी आइडी तैयार कर अश्लील पोस्ट डाली। वह निर्दोष है और यह भी तर्क दिया कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी है, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। सरकारी वकील ने कहा कि याची अहमदाबाद में अपने मामा के घर गया था, जहां अपना सिम कार्ड मामा के लड़के के मोबाइल फोन में लगाकर अश्लील पोस्ट की गई। एफआइआर दर्ज होते ही मोबाइल फोन व सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि संविधान बहुत उदार है, धर्म न मानने वाला नास्तिक सकता है लेकिन इससे किसी को दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि मानव खोपड़ी हाथ में लेकर नृत्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, यह अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी कानून में भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम गैर जमानती अपराध है। राज्य सुरक्षा को खतरे में डालने वाली अफवाह फैलाना, अश्लीलता फैलाना अभिव्यक्ति की आजादी नहीं बल्कि अपराध है।

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