ज्यादा देर तक मोबाइल या टीवी देखता है आपका बच्चा तो हो जाइए सावधान, आंखों में हो सकती है ये बीमारी

बिजनौर। मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों की आंखों की रोशनी पर असर पड़ने लगा है। ज्यादा देर तक मोबाइल पर गेम खेलकर और पढ़कर बच्चे मायोपिया का शिकार हो रहे हैं। उनकी आंखों की रोशनी माइनस में जा रही है। कम उम्र में ही बच्चों की आंखों पर चश्मा चढ़ रहा है।

कोरोना से पहले भी बच्चे मोबाइल के बहुत आदी हो गए थे, लेकिन बाद की स्थिति ने मोबाइल और बच्चों का एक दूसरे का पूरक बना दिया है। कोरोना के शुरुआत में दो तीन महीने बच्चों ने मोबाइल पर ही समय बिताया, अभिभावकों ने भी उन्हें नहीं टोका। उन्हें लगा कि घर में हैं तो बच्चे सुरक्षित हैं। इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। नवंबर, दिसंबर में स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ तो इस साल फरवरी में फिर कोरोना की दूसरी लहर आ गई। इस स्थिति में बच्चे घरों के अंदर तो रहे ही, हर समय केवल मोबाइल में ही गेम खेलने और पढ़ाई में लगे रहे। इसका असर बच्चों की आंखों पर पड़ा है।

बच्चे मायोपिया बीमारी का शिकार हो गए हैं। इसमें बच्चों की आंखों का नंबर माइनस में जा रहा है और उनकी आंख कमजोर हो रही हैं। समय-समय पर बच्चों की आंखों की जांच न कराने की वजह से स्थिति और बिगड़ रही है। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज सेन के अनुसार बच्चों को मोबाइल का प्रयोग कम कराना चाहिए। उनका खुले में जरूर खेलने देना चाहिए। एहतियात बरतकर ही आंखों का ध्यान रखा जा सकता है।

आंखों की सुरक्षा के लिए ये करें

  • दिन में एक घंटा बच्चों को खुले में खेलने दें।
  • मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम कराएं।
  • टीवी व मोबाइल को उचित दूरी से देखें।
  • पढ़ाई लैपटॉप व टैबलेट से कराएं।
  • हरे पत्ते की सब्जी, पीले फल और गाजर खिलाएं।
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