पंजाब में रामलीला होगी भी या नहीं, बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है। पंजाब की सभी रामलीला समितियों के पदाधिकारी इस समय रुपनगर सिटी थाने में बैठे हैं। रूपनगर, जिसे प्रचलित तौर पर रोकड़ नाम से जानते हैं, वहाँ की रामलीला में 9 अक्टूबर को संत बाबा सुखबीर सिंह जी को मुख्य अतिथि बुलाया गया।
संत बाबा सुखबीर सिंह जी का विरोध करने वाले यह कहकर पहुँच गए कि रामलीला तो हिंदुओं की है और आप सिख होकर कैसे इसमें मुख्य अतिथि बन सकते हैं। बहस बढ़ी तो संत बाबा सुखबीर सिंह का विरोध करते रामलीला के लिए अपशब्द तक कहे गए। स्थिति बिगड़ते देख सुखबीर जी और श्रद्धालु भी चले गए।
इसके आगे जो हुआ, शर्मसार करने वाला है। जब पुलिस वहाँ पहुँची तो रामलीला का विरोध करने वालों ने किसान यूनियन के झंडे निकाल लिए और नारेबाज़ी करने लगे। आरोप लगाया कि रामलीला समिति के सदस्य भाजपा से जुड़े हैं और भाजपा के नारे लगा रहे थे। डीएसपी ने किसी तरह बीच बचाव किया।
अब रामलीला समिति ने तय किया है कि अगर अराजक तत्वों पर कार्रवाई नहीं की गई तो शहर की सभी रामलीला और मंदिरों को बंद करके विरोध किया जाएगा। अभी थोड़ी देर पहले समिति के महासचिव अश्वनी कुमार पप्पी जी ने मुझे थाने से यह जानकारी दी है। कल्पना कीजिए कि पंजाब में क्या हो रहा है।
किसान यूनियन के झंडे वाले लोग राम और रामलीला का विरोध करें तो इसमें समझने की आवश्यकता है कि किसान नहीं, कम्युनिस्ट हैं और हो सकता है कि पंजाब में ईसाई मिशनरी भी इसे समर्थन दे रही हों। कुल मिलाकर स्थिति भयावह है। हो सकता है कि शिकायत दर्ज करके इस बार मामला रफ़ा-दफा कर दिया जाए।

