नई दिल्ली। ईडी द्वारा नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में राजनीतिक भूचाल सा आ गया है। फिल्म स्टार शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद अपने बयानों से चर्चाओं में आए थे। आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे सरकार में नवाब मलिक के पास अल्पसंख्यक, उद्यम और कौशल विकास का कैबिनेट मंत्रालय है। साथ ही वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं और पार्टी के मुंबई शहर के अध्यक्ष भी हैं। मलिक ने अपने करियर की शुरुआत एक कबाड़ी के तौर पर शुरू की थी और कुछ साल पहले तक वे इससे जुड़े रहे हैं। अब हर कोई नवाब मलिक को जानना चहता है।
नवाब मलिक का जन्म 20 जून 1959 को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के उतरौला तहसील के एक गांव में हुआ था। नवाब मलिक का परिवार खेती.बाड़ी से जुड़ा था। परिवार के कुछ सदस्य कारोबार से जुड़े थेए इसलिए पूरा परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था। इनके परिवार का मुंबई में एक होटल था और परिवार के अन्य सदस्य कबाड़ के कारोबार से जुड़े थे। मलिक ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा थाए ष्हांए मैं कबाड़ीवाला हूं। मेरे पिता मुंबई में कपड़े और कबाड़ का कारोबार करते थे। विधायक बनने तक मैंने भी कबाड़ का कारोबार किया। मेरा परिवार अब भी वही करता है। मुझे इस पर गर्व है ।
मलिक ने 21 साल की उम्र में 1980 में महजबीन से शादी। इस शादी से उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। मलिक के कारोबार को उनके बेटे और बेटियां मिल कर चला रहे हैं।
नवाब कॉलेज में पढ़ रहे थे तभी मुंबई यूनिवर्सिटी ने कॉलेज की फीस बढ़ा दी थी। उसके विरोध में शहर में आंदोलन चल रहा था। उस आंदोलन में नवाब मलिक ने एक आम छात्र की तरह भाग लिया था। आंदोलन के दौरान पुलिस की पिटाई से नवाब घायल हो गए। नवाब मलिक का कहना है कि इसी दौरान उनकी राजनीति में रुचि हो गई। उन्होंने कांग्रेस से 1991 में नगर निगम चुनाव के लिए टिकट मांगा, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन नवाब मलिक राजनीतिक तौर पर अपनी जगह बनाने की कवायद में जुटे रहे।
मुंबई और आस-पास के इलाकों में बाबरी मस्जिद की घटना के बाद समाजवादी पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के बीच लोकप्रियता हासिल कर रही थी। उसी दौरान नवाब मलिक भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। 1995 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी से मुस्लिम बहुल नेहरू नगर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट मिला। उस समय शिवसेना के सूर्यकांत महादिक 51 हजार 569 वोट पाकर जीते थे। नवाब मलिक 37,511 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे। मलिक हार गए, लेकिन अगले ही साल विधानसभा पहुंच गए। धर्म के आधार पर वोट मांगने को लेकर विधायक महादिक के खिलाफ दायर याचिका पर उन्हें दोषी पाया गया और चुनाव आयोग ने चुनाव रद्द कर दिया। इसलिए 1996 में नेहरू नगर निर्वाचन क्षेत्र में फिर से चुनाव हुआ। इस बार नवाब मलिक ने करीब साढ़े छह हजार मतों से जीत हासिल की।
1999 के विधानसभा चुनाव में नवाब मलिक फिर से समाजवादी पार्टी से जीते। तब कांग्रेस और NCP सत्ता में आई। समाजवादी पार्टी से दो विधायक चुने गए। उन्हें भी मोर्चे का समर्थन करने के लिए सत्ता में भागीदारी मिली। इसके बाद नवाब मलिक आवास राज्य मंत्री बने।

