जानिए बिजनौर जिले की आठों सीटों का हाल, किसका किससे है मुकाबला

नजीबाबाद विधानसभा : त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी सीट
नजीबाबाद। सपा-रालोद गठबंधन, भाजपा और बसपा प्रत्याशी में त्रिकोणात्मक मुकाबला हुआ। मुस्लिम मतदाताओं ने बसपा प्रत्याशी के पक्ष में भी मतदान किया। भाजपा के परंपरागत मतों के साथ कुछ अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं ने भी मतदान किया। सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी विधायक हाजी तसलीम अहमद, भाजपा प्रत्याशी कुंवर भारतेंद्र सिंह, बसपा प्रत्याशी शाहनवाज आलम ने मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में रिझाने का प्रयास किया। बसपा के शाहनवाज आलम ने अनुसूचित जाति के परंपरागत वोटों के साथ मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर रिझाने में कामयाबी हासिल की। सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी तसलीम अहमद के पक्ष में अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं ने मतदान किया।
विधानसभा क्षेत्र नजीबाबाद सीट से पहली बार चुनाव लड़ रहे साहनपुर निवासी कुंवर भारतेंद्र सिंह ने भाजपा के परंपरागत वोटरों के साथ व्यक्तिगत संबंधों का लाभ लेते हुए अनुसूचित जाति और कुछ मुस्लिम मतदाताओं ने भी सेंध मारने में कामयाबी हासिल की। फिलहाल तीनों प्रत्याशियों में कड़ा मुकाबला है। कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे अकबरपुर आंवला निवासी हाजी मो.सलीम अंसारी ने वर्तमान चुनाव में कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए भरपूर मेहनत की।

नहटौर विधानसभा : भाजपा और रालोद के बीच कांटे की टक्कर

भाजपा के उम्मीदवार ओमकुमार और रालोद के उम्मीदवार मुंशीराम पाल में सीधी टक्कर हुई है। यहां मुस्लिम एकजुट होकर रालोद के साथ जाता दिखा। वहीं, दलितों का बंटवारा भाजपा को उम्मीद बंधा रहा है। जाट बाहुल्य इस सीट पर गठबंधन की हवा बनी हुई थी। अधिकांश जाट मतदाता रालोद के साथ गया है। पिछड़ी जाति के सैनी मतदाता और पाल मतदाता में भी गठबंधन के प्रत्याशी ने सेंधमारी कर ली है। हालांकि हार जीत किसकी होगी यह नतीजों के बाद भी पता चल सकेगा। गठबंधन को जीत के बेहद करीब देखा जा रहा है।

बिजनौर विधानसभा : भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन में टक्कर
बिजनौर सीट पर सपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार डॉ. नीरज चौधरी और भाजपा की प्रत्याशी विधायक सुचि चौधरी के बीच कांटे की टक्कर है। इस सीट पर मुस्लिमों का बिखराव नहीं हो सका। जिस वजह से गठबंधन मजबूत होता दिख रहा है। हालांकि बसपा को मुस्लिम नहीं मिलते देख दोपहर बाद दलितों के रुख में बदलाव हुआ। दलित वोट भाजपा की ओर खिसका है। इस सीट पर दलितों का बंटवारा भाजपा को जीत की उम्मीद बंधा रहा है। उधर, गठबंधन मुस्लिम और जाटों के गठजोड़ के सहारे जीत को पक्का मान रहा है। हालांकि मतदान के दिन दोपहर बाद जाट मतदाताओं ने भी भाजपा को वोट किया।

चांदपुर विधानसभा : दलित वोट तय करेंगे किसकी होगी जीत
भाजपा विधायक कमलेश सैनी की पिछले चुनाव में सबसे बड़ी जीत हुई थी, अबकी बार गठबंधन ने सीधी टक्कर दी है। गठबंधन को काफी मजबूत माना जा रहा है। हालांकि बसपा के उम्मीदवार डॉ. शकील हासमी ने मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की है। चांदपुर में दलित वोटों पर दारोमदार टिका हुआ है। भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन दोनों ही दलित वोटों का सेंधमारी का दावा कर कर रहे हैं। माना यह जा रहा है कि दलितों का रुख जिसकी ओर रहा, उसी के सिर पर जीता का ताज सजेगा।

बढ़ापुर विधानसभा : मुस्लिमों के बंटवारे ने भाजपा को राहत
बढ़ापुर में बसपा के उम्मीदवार मोहम्मद गाजी ने मुस्लिमों में सेंधमारी कर दी। माना जा रहा है कि तीस से चालीस प्रतिशत मुस्लिम बसपा की तरफ गया है। पहले सपा और भाजपा में ही सीधी टक्कर मानी जा रही थी। भाजपा के उम्मीदवार कुंवर सुशांत सिंह ठाकुर और पिछड़ी जातियों के वोट के सहारे जीत पक्की मान रहे हैं। मुस्लिमों के बंटवारे का भी भाजपा को ही फायदा मिलेगा। सपा के उम्मीदवार कपिल गुर्जर जाट-गुर्जर और मुस्लिमों के सहारे जीत का दावा कर रहे हैं।

धामपुर विधानसभा : त्रिकोणीय मुकाबला, सबको जीत की उम्मीद
धामपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के अशोक राणा, बसपा मूलचंद चौहान और सपा के नईम उल हसन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। धामपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन लाख तीन हजार वोट हैं, इनमें से करीब 67 हजार मतदाता चौहान बिरादरी, 50 हजार दलित, एक लाख 24 हजार मुस्लिम मतदाता व बाकी अन्य बिरादरी के मतदाता शामिल हैं। युवा शिक्षित वर्ग ने रोजगार को विकल्प के रूप में चुन कर वोटिंग करने की बात कही है।

नूरपुर विधानसभा : मुस्लिम गठबंधन की ओर, भाजपा को मिला सबका वोट
नूरपुर। विधानसभा क्षेत्र में मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों में बिखराव नजर नहीं आया, अधिकांश का रुख गठबंधन की तरफ दिखा। हिंदुओं में तमाम जाति-बिरादरी का वोट भाजपा की ओर दिखा। इनमें सैनी और दलितों में बंटवारा भी नजर आया। दलित वोट बसपा और भाजपा दोनों ओर दिखा। सैनी वोट का बंटवारा भाजपा और गठबंधन के बीच होता दिखा। गठबंधन और भाजपा मुकाबले में नजर आई। बसपा भी मुस्लिम वोट लेने और अपने परंपरागत वोट बैंक के भरोसे मुकाबले में बनी रह सकती है।
निर्धारित समय सुबह सात बजे सभी मतदान केंद्रों पर चुनाव शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक मतदान केंद्रों पर भीड़ नजर आई और दो घंटे में करीब 8.5 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद मतदान की रफ्तार सुस्त हो गई। दोपहर के बाद मतदान में फिर तेजी आई। फतेहाबाद के बूथ संख्या 343 पर ईवीएम में खराबी आने से करीब आधा घंटा मतदान बाधित रहा। बाद में बैटरी बदलकर मशीन को ठीक किया गया। निर्धारित समय शाम छह बजे तक कई मतदान केंद्रों पर वोट डालने के लिए मतदाताओं की लाइन लगी हुई थी।

नगीना विधानसभा सीट : गठबंधन और भाजपा के बीच टक्कर
चुनाव प्रचार के दौरान ही नगीना विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी के बीच माना जा रहा था। लेकिन आशंका व्यक्त की जा रही थी कि बसपा प्रत्याशी इंजीनियर बृजपाल सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतरीं कांग्रेस नेता ओमवती की पुत्रवधू हैनरीता चुनावी समीकरणों को बिगाड़ सकती हैं, लेकिन मतदान के दिन भी मुख्य मुकाबला सपा विधायक व पार्टी प्रत्याशी मनोज पारस और भाजपा प्रत्याशी डॉ. यशवंत सिंह के बीच ही नजर आया। मतदान कर लौटे लोगों की मानें तो बसपा प्रत्याशी के परंपरागत वोट में सेंध लगाने में सपा व भाजपा प्रत्याशी कुछ हद तक कामयाब हो गए। जबकि बसपा प्रत्याशी सपा के परंपरागत वोट में कुछ खास सेंध नहीं लगा पाए। वहीं, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का परंपरागत वोट बंटता हुआ दिखाई नहीं दिया।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा का भी परंपरागत वोट एकमुश्त भाजपा के साथ चट्टान की तरह खड़ा दिखाई दिया। भाजपा प्रत्याशी ने रालोद के परंपरागत वोट में भी काफी हद तक सेंध लगाई, लेकिन सपा के परंपरागत वोट का खास बंटवारा न होना भाजपा की चिंता जरूर बढ़ा रहा है। आंबेडकर समाज पार्टी के समर्थक समाजवादी पार्टी और बसपा के परंपरागत वोट में काफी मात्रा में सेंध लगाने का दावा कर रहे हैं। नगीना सीट पर मौजूदा विधायक मनोज पारस जीत की हैट्रिक लगाएंगे या भाजपा अपने 23 साल के सूखे को समाप्त कर देगी, यह अब 10 मार्च को ही पता चल पाएगा।

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