बलरामपुर | उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले में कथित धर्मांतरण रैकेट चलाने के आरोपों में घिरे छांगुर बाबा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एटीएस द्वारा गिरफ़्तारी के बाद अब उनके खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी जांच शुरू कर दी है। बाबा के करीबी और सहयोगी भी पुलिस की रडार पर हैं, वहीं उनका मकान बुलडोज़र से गिरा दिया गया है, जिससे इलाके में हलचल तेज हो गई है।
कौन हैं छांगुर बाबा?
बलरामपुर ज़िले के रेहरा माफ़ी गांव के रहने वाले छांगुर बाबा कभी नग और अंगूठी बेचते थे और साइकिल पर घूम-घूम कर भीख मांगते थे। ग़रीबी में पले-बढ़े छांगुर बाबा दो बार अपने गांव के प्रधान भी रह चुके हैं (2005-2010 और 2015-2020)। इसके बाद उन्होंने खुद को पीर घोषित कर दिया और धीरे-धीरे उनका नेटवर्क फैलता गया। मुंबई में लंबे समय तक रहे छांगुर बाबा ने वहीं कई लोगों से संपर्क बनाए और कथित रूप से धर्मांतरण का रैकेट खड़ा किया। चांद औलिया दरगाह के पास उन्होंने एक बैठक बना रखी थी, जहां दूर-दराज़ से लोग उनसे मिलने आते थे।
गिरफ़्तारी और बुलडोज़र की कार्रवाई
पांच जुलाई को उत्तर प्रदेश एटीएस ने छांगुर बाबा को मुंबई निवासी नीतू रोहरा उर्फ़ नसरीन के साथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि बाबा और उनके सहयोगी विदेश से आए फंड्स का इस्तेमाल अवैध धर्मांतरण के लिए करते थे।
इसके बाद, बलरामपुर के उतरौला क्षेत्र में स्थित उनके घर को बुलडोज़र से गिरा दिया गया, जो नीतू रोहरा के नाम पर रजिस्टर्ड था। ज़िलाधिकारी पवन अग्रवाल के मुताबिक़, “यह इमारत सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की गई है।”
विदेशी फंडिंग और करोड़ों की संपत्ति का मामला
उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश ने कहा कि छांगुर बाबा और उनके सहयोगियों ने 40 से अधिक बैंक खातों के ज़रिए करीब 100 करोड़ रुपये का लेन-देन किया है। इन खातों में NGO और अलग-अलग संस्थानों के नाम पर फंड ट्रांसफर किया गया, जिससे कई संपत्तियाँ खरीदी गईं। अब ईडी (Enforcement Directorate) इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा कहां से आया और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ।
विवाद की जड़ में सहयोगी का आरोप
स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार, छांगुर बाबा और उनके सहयोगी बब्बू चौधरी के बीच घर के निर्माण को लेकर पैसे का विवाद हुआ था। बब्बू ने ही सबसे पहले बाबा के खिलाफ अवैध धर्मांतरण की शिकायत की थी। इसके बाद कई संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की थी। छांगुर बाबा ने भी बब्बू के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अब दोनों पक्षों पर केस दर्ज है और जांच चल रही है।
गाँव में सन्नाटा, लोग चुप
रेहरा माफ़ी गांव में लोगों के बीच डर और सन्नाटा है। बुलडोज़र कार्रवाई के समय केवल उनकी बहू साबिरा महबूब घर में मौजूद थीं। उन्होंने कहा, पिछले एक महीने से पुलिस ने घर को घेरा हुआ है। बच्चे डरे हुए हैं। पुलिस ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए हैं। गांव के लोग इस मामले में मीडिया से बात करने से बच रहे हैं।

