मुजफ्फरनगर। मीरापुर के मोहल्ला मुस्तर्क में मुस्लिम बहुल इलाके के बीच स्थित लगभग 600 साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर अब फिर से जागृत होने जा रहा है। मराठा काल में निर्मित इस मंदिर के आसपास पहले ब्राह्मण परिवार निवास करते थे, लेकिन 1989 में सामाजिक तनाव के चलते उन्होंने पलायन कर दिया था। इस मंदिर में पिछले 36 वर्षों से पूजा-अर्चना नहीं हुई है, लेकिन अब संत समाज और स्थानीय हिंदू समुदाय ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है।

ऐतिहासिक महत्व:
मराठा शासनकाल के दौरान बनाए गए इस शिव मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। मंदिर के आसपास ब्राह्मण परिवारों की उपस्थिति मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना और देखरेख सुनिश्चित करती थी। 1989 में क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा और एक दुखद घटना के बाद इन परिवारों ने पलायन कर दिया, जिससे मंदिर वीरान और जर्जर स्थिति में पहुंच गया।
पुनर्जीवन की पहल:
बघरा आश्रम के संस्थापक स्वामी यशवीर महाराज को जब स्थानीय लोगों ने इस मंदिर के बारे में जानकारी दी तो उन्होंने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। 13 फरवरी को सुबह 10 बजे विशेष हवन और पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिससे मंदिर में फिर से धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत होगी। इसके बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य भी शुरू किया जाएगा।
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि यह विचारणीय है कि जब किसी क्षेत्र में जनसंख्या संरचना बदलती है तो हिंदू परिवारों को पलायन क्यों करना पड़ता है और मंदिर क्यों उपेक्षित हो जाते हैं। उन्होंने भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
1989 में एक दुखद दोहरे हत्याकांड के बाद ब्राह्मण परिवारों ने इस क्षेत्र से पलायन किया। शशांक शर्मा, जिनका परिवार पहले मंदिर के पास तीन बीघा जमीन का मालिक था, ने बताया कि इस घटना के बाद उनका परिवार पंजाबी कॉलोनी में बस गया। मंदिर की सुरक्षा को लेकर कई बार विवाद भी हुए। अब 13 फरवरी को मंदिर में हवन कर इसे फिर से धार्मिक गतिविधियों के केंद्र में लाने की तैयारी है।

