मुजफ्फरनगर : गठबंधन ने जीती चार सीट, भाजपा को दो पर ही करना पड़ा संतोष

मुजफ्फरनगर। जिले में सपा-रालोद गठबंधन ने चार सीटें जीतकर भाजपा को झटका दिया है। मुजफ्फरनगर सदर और खतौली सीट पर ही कमल खिल सका। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की। मीरापुर से गठबंधन के चंदन चौहान पहली बार विधायक बनने में सफल हुए। कांग्रेस के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई, जबकि बसपा का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा।

मुजफ्फरनगर सदर सीट पर भाजपा प्रत्याशी कपिल देव अग्रवाल ने रालोद के सौरभ स्वरूप को पराजित कर हैट्रिक बनाई। कपिल को 111794, जबकि सौरभ को 93100 मत मिले। खतौली में भाजपा के विक्रम सैनी लगातार दूसरी बार जीतने में कामयाब रहे। विक्रम ने 100651 और रालोद के राजपाल सैनी को 84306 वोट मिले हैं।

गठबंधन प्रत्याशियों ने शानदार जीत हासिल की। बुढ़ाना से रालोद के राजपाल बालियान ने भाजपा के उमेश मलिक को शिकस्त दी। बालियान को 131093 वोट मिले, जबकि मलिक को 102783 मत मिले। मीरापुर सीट पर रालोद के चंदन चौहान ने 107421 मत हासिल कर भाजपा से यह सीट छीन ली। भाजपा प्रत्याशी प्रशांत गुर्जर को 80041 वोट मिल सके।

सुरक्षित सीट पुरकाजी सीट से रालोद के अनिल कुमार ने नजदीकी मुकाबले में भाजपा के प्रमोद उटवाल को पराजित कर दिया। अनिल को 92672 और उटवाल को 86140 वोट मिले। चरथावल सीट पर सपा के पंकज मलिक ने पूर्व राज्यमंत्री स्वर्गीय विजय कश्यप की पत्नी सपना कश्यप को हरा दिया। पंकज ने 97363 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा की सपना को 92029 मत मिले। कांग्रेस के पुरकाजी से प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री दीपक कुमार केवल 1762 मत ही हासिल कर सके।

मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता ने बिगाड़ दिया भाजपा का खेल

मुजफ्फरनगर। मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता ने गठबंधन प्रत्याशियों को जीत की ऊंचाई दी। सपा और रालोद ने चुनावी रण में कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा था, इसके बावजूद मुस्लिमों ने बसपा और कांग्रेस के सजातीय उम्मीदवारों को तवज्जो नहीं दी। यही वजह है कि जिले में भाजपा को चार सीट गंवानी पड़ी।

सपा और रालोद ने रणनीति के तहत चुनाव में छह सीटों पर कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा था। ऐसी स्थिति में बसपा और कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों को यह उम्मीद बंधी थी कि अल्पसंख्यक मतदाता उनके पक्ष में वोट कर सकता है। बसपा के दलित और मुस्लिम समीकरण के भी कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन नतीजे सामने आए तो साफ हो गया कि मुस्लिमों ने गठबंधन को बंपर मतदान किया है। चरथावल सीट पर कांग्रेस से बसपा में आए सलमान सईद को केवल 25131 वोट मिले। मुस्लिमों का सईद के हक में मतदान न करना सपा के पंकज मलिक की जीत की राह आसान कर गया।

मीरापुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक मौलाना जमील और बसपा उम्मीदवार मोहम्मद सालिम भी क्रमश: 1258 और 23797 वोट ही हासिल कर पाए। मुस्लिमों ने रालोद प्रत्याशी चंदन चौहान को ही प्राथमिकता दी। बुढ़ाना विधानसभा सीट पर बसपा के हाजी अनीस को भी सिर्फ 10397 मतों पर संतोष करना पड़ा। उधर, चरथावल से कांग्रेस की उम्मीदवार यासमीन राव को भी मुस्लिमों ने नकार दिया। उन्हें केवल 965 वोट ही मिले।

पाला बदलकर कोई जीता तो कोई हारा
कांग्रेस के टिकट पर बघरा और शामली से दो बार विधायक रहे पंकज मलिक को चुनाव से पहले सपा का दामन थामना रास आया। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक के बेटे पंकज की गिनती कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों में होती थी। चरथावल सीट पर पहली बार चुनाव लड़े पंकज ने यहां से जीत दर्ज कराकर जिले की राजनीति में बड़ा कदम बना लिया है।

मलिक की जीत के इसलिए भी खास मायने हैं कि क्योंकि चरथावल सीट के अंतगर्त ही केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान का गांव कुटबी आता है। मीरापुर से बसपा के विधायक रहे मौलाना जमील ने चुनाव से पहले रालोद छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन की, लेकिन जीत नहीं सके। कांग्रेस छोड़कर बसपा में आए पूर्व गृह राज्यमंत्री सईदुज्जमां के बेटे सलमान सईद का फैसला भी गलत साबित हुआ। वह चरथावल से हार गए हैं। खतौली में चुनाव हारे पूर्व मंत्री राजपाल सैनी बसपा से सपा में आए थे, लेकिन चुनाव रालोद के सिंबल पर लड़ा।

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