PM मोदी का वीडियो पहले ब्लॉक, फिर बहाल, IT मंत्रालय ने Meta के ग्लोबल हेड्स को किया तलब

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ समय के लिए भारत में प्रतिबंधित (रिस्ट्रिक्ट) किए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह वीडियो इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि प्रधानमंत्री ने इसे पहली बार सेल्फी मोड में रिकॉर्ड कर युवाओं को सीधे संबोधित किया था।

जानकारी के अनुसार, देर रात जब उपयोगकर्ताओं ने वीडियो देखने का प्रयास किया और “See Why” विकल्प पर क्लिक किया, तो संदेश दिखाई दिया कि “कानूनी अनुरोध का पालन करते हुए इस कंटेंट को भारत में प्रतिबंधित किया गया है।” इसके बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर सवाल उठने लगे।

मामले के तूल पकड़ने पर मेटा ने सफाई जारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो गलती से हट गया था और तकनीकी त्रुटि को सुधारते हुए उसे दोबारा उपलब्ध करा दिया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वीडियो को जानबूझकर नहीं हटाया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने मेटा और इंस्टाग्राम के वैश्विक प्रमुखों (ग्लोबल हेड्स) को तलब किया है। माना जा रहा है कि सरकार इस बात का जवाब चाहती है कि देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक वीडियो पर इस तरह की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई।

यह विवाद उस समय सामने आया, जब जंतर-मंतर पर CJP के समर्थक शिक्षा से जुड़े मुद्दों और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने संसद की ओर बढ़ने से रोक दिया था।

इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं के नाम वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने पेपर लीक जैसे मामलों को गंभीरता से लिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब मेटा द्वारा वीडियो को पहले प्रतिबंधित और बाद में बहाल किए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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