कांग्रेस में बगावत तेज, प्रियंका और सोनिया की सुनने को तैयार नहीं कांग्रेसी

Priyanka and Sonia

नई दिल्ली। एक समय था जब कांग्रेस में गांधी परिवार की तूती बोलती थी। ये परिवार जिसको भी कुछ कह देता था वह पत्थर की लकीर हो जाती थी। धीरे-धीरे भारत से कांग्रेस का वर्चस्व खत्म होने लगा और कांग्रेस से गांधी परिवार का। अभी हाल ही में पांच राज्यों में मिली हार से गांधी परिवार पर ही अपने लोग अगुलियां उठाने लगे।

इस बार कांग्रेस के लिए यह नई मुश्किल केरल से आई है। इस राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट इै जिसपर कांग्रेस जीतने की स्थिति में है। इस सीट पर पार्टी हाईकमान ने सचिव श्रीनिवासन कृष्णन को नॉमिनेट कर दिया है। इसे लेकर केरल यूनिट में बवाल मच गया है। केरल के नेता इससे बेहद खफा दिखाई दे रहे हैं और उनकी ओर से लीडरशिप को कहा गया है कि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। स्टेट यूनिट की ओर से कहा गया है कि उनकी ओर से भेजे गए प्रस्ताव को महत्व दिया जाना चाहिए था। प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरण ने पार्टी लीडरशिप से कहा है कि उनकी इच्छा है कि किसी युवा नेता को मौका मिले।

पार्टी सूत्रों के अनुसार स्टेट यूनिट की ओर से एम लिजू का नाम सुझाया गया था, जो यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। फिलहाल उनके पास अलपुझा जिले के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। सुधाकरण ने कहा कि हाईकमान की ओर से शुक्रवार को यह फैसला लिया गया था। इस फैसले के खिलाफ के सुधाकरण की राय का राज्य के कई और नेता भी समर्थन कर रहे हैं। बीते सप्ताह ही राज्यसभा सीट पर दावे के लिए सीनियर लीडर केवी थॉमस ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। लेकिन स्टेट यूनिट का कहना था कि किसी युवा नेता को मौका मिलना चाहिए।

एक प्रस्ताव यह भी था कि किसी महिला नेता को उच्च सदन में भेजा जाए। इसकी वजह यह है कि केरल से बीते 5 दशकों में कोई महिला नेता राज्यसभा में नहीं रही है, लेकिन 58 वर्षीय श्रीनिवास कृष्णन के प्रस्ताव को लेकर नेताओं में रोष है। कृष्णन को प्रियंका गांधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा का करीबी माना जाता है। हाईकमान की ओर से उनके नाम का सुझाव दिया गया, जिस पर स्टेट यूनिट ने गहरी आपत्ति जाहिर की है। केरल के त्रिशूर के रहने वाले कृष्णन तेलंगाना के प्रभारी हैं और रॉबर्ट वाड्रा के मालिकाना हक वाली कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का भी हिस्सा हैं।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ऐसा लगता है कि पार्टी अब भी गलतियों से सीखना नहीं चाहती है। हम अब नॉमिनेशन की पॉलिटिक्स नहीं चलने देंगे। राज्य के किसी नेता को राज्यसभा में भेजना चाहिए। किसी भी नॉमिनेटेड नेता को यह मौका नहीं मिलना चाहिए। यहां तक कि सीनियर लीडर के मुरलीधरण ने तो इसके खिलाफ सोनिया गांधी को खत ही लिख दिया है।

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