नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण के लिए पात्रता निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय के मानदंड अपनाने को लेकर केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। अदालत ने कहा कि आप आठ लाख की सीमा लागू करके असमान को बराबर बना रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने पूछा, क्या सरकार ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों को नीट के मेडिकल कोर्स में आरक्षण के लिए आठ लाख की सीमा पर पुनर्विचार करेगी? कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह नीतिगत मामले में कोई दखल नहीं देना चाहता, केवल इतना जानना चाहता है कि इसमें सांविधानिक सिद्धांतों का पालन किया गया है या नहीं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने इस मुद्दे पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा हलफनामा दाखिल नहीं करने पर नाखुशी जताई। अदालत ने कहा, हम ईडब्ल्यूएस श्रेणी निर्धारित करने के सरकार के आठ लाख के मानदंड की अधिसूचना पर रोक लगा सकते हैं, आप हलफनामा देते रहिये।
इस पर एएसजी केएम नटराज ने कहा, हलफनामे का मसौदा तैयार है और दो-तीन दिनों में दायर कर दिया जाएगा। पीठ ने पूछा, हमें इतना बताएं कि आप इस पर पुनर्विचार करेंगे या नहीं। यदि आप चाहते हैं कि हम अपना काम करें तो हम यह करने को तैयार हैं। हम जो सवाल पूछ रहे हैं, उनका एक हफ्ते के अंदर जवाब दें।
शीर्ष अदालत केंद्र और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के उस फैसले को चुनौती वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें नीट मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए ओबीसी को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया था। उल्लेखनीय है कि अदालत ने 7 अक्तूबर की सुनवाई में ईडब्ल्यूएस मानदंड को लेकर सवाल उठाए थे और केंद्र से जवाब देने को कहा था। इस मामले पर अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों के मांगे जवाब
- क्या केंद्र ने ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए मानदंड पर पहुंचने से पहले कोई कवायद की? 2. यदि हां, तो क्या सिंह आयोग की रिपोर्ट पर आधारित मानदंड है? यदि ऐसा है तो रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाया जाए।
- ओबीसी में क्रीमी लेयर और ईडब्ल्यूएस के लिए आय सीमा समान है (आठ लाख रुपये वार्षिक)। ओबीसी में आर्थिक रूप से संपन्न श्रेणी को आरक्षण से बाहर रखा गया है। ऐसे में क्या ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के लिए समान आय सीमा प्रदान करने को मनमानी नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की कोई अवधारणा नहीं है। 4. क्या इस सीमा को तय करते समय ग्रामीण और शहरी क्रय शक्ति में अंतर को ध्यान में रखा गया था?
- किस आधार पर संपत्ति अपवाद के नतीजे पर पहुंचा गया और उसके लिए कोई अभ्यास किया गया था?
- आवासीय फ्लैट मानदंड, महानगरीय और गैर-महानगरीय क्षेत्र में अंतर आखिर क्यों नहीं है? आप हवा में आठ लाख का मानदंड नहीं तय कर सकते।
पीठ ने ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर के लिए आठ लाख रुपये के मानदंड का हवाला देते हुए केंद्र से सवाल किया कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के लिए समान मानदंड कैसे अपनाया जा सकता है, जबकि ईडब्ल्यूएस में कोई सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन नहीं है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा, आपके पास कुछ जनसांख्यिकीय या सामाजिक-आर्थिक आंकड़े होने चाहिए। आप हवा में आठ लाख रुपये का मानदंड नहीं ला सकते।

