नई दिल्ली। दिल्ली में लड़कियों के जन्मदर में लगातार चौथे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में 2024 के दौरान लिंगानुपात दर घटकर 920 हो गया है। यानी 1000 लड़कों की तुलना में 920 लड़कियों का जन्म हुआ। जबकि 2023 में यह आंकड़ा 922 था। वहीं 2022 में यह संख्या 929 थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि इसकी संभावना थी, क्योंकि राजधानी में प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण की संख्या बढ़ रही है और अधिकारियों को इसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। दिल्ली सरकार की जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट में 2024 की जानकारी दी गई है। वर्ष 2024 के दौरान कुल 3,06,459 जन्म दर्ज की गई, जबकि 2023 में यह 3,15,087 थी। वार्षिक रिपोर्ट अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु) कार्यालय ने जारी की ह
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नैंसी नागपाल, जो पहले दिल्ली सरकार के एक अस्पताल में काम करती थीं, इस बात से सहमत हैं कि लोगों का एक वर्ग अभी भी लड़के को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि मैंने कई संपन्न परिवारों को लिंग परीक्षण करवाने के लिए विदेश जाते देखा है।
दिल्ली नगर निगम में अस्पताल प्रशासन के पूर्व निदेशक डॉ. अरुण यादव ने कहा कि यह प्रवृत्ति चिंताजनक है और सरकार को यह देखने की जरूरत है कि क्या लिंग निर्धारण परीक्षण किए जा रहे हैं और क्या कन्या भ्रूण हत्या अभी भी की जा रही है।
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में शिशु मृत्यु दर में 2023 की तुलना में गिरावट देखने को मिली है। 2023 में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार पर 23.61 थी, जबकि 2024 में यह थोड़ा घटकर 22.40 रह गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि शिशु मृत्यु दर में गिरावट दिल्ली के सार्वजानिक स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने का नतीजा है। शिशु मृत्यु दर में थोड़ी कमी के साथ मातृ मृत्यु दर में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है। 2023 में मातृ मृत्यु दर 0.45 थी, जो 2024 में घटकर 0.44 प्रति हजार जन्म पर आ गई है। दिल्ली में जन्म दर 2023 की तुलना में 14.66 प्रति हजार जनसंख्या से घटकर वर्ष 2024 में 14.00 हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में मृत्यु दर 6.16 के मुकाबले 2024 के दौरान थोड़ा बढ़कर 6.37 प्रति हजार हो गई है। आंकड़ों से पता चला है कि वर्ष 2005 में प्रति 1000 लड़कों पर 822 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया था। लेकिन 2008 के दौरान लिंगानुपात उलट गया, जिससे प्रति 1000 पुरुषों पर 1004 लड़कियों का जन्म हुआ जो अभूतपूर्व था। इसमें दिल्ली सरकार की लाडली योजना का हाथ माना गया। 2015 में जन्म के समय लिंगानुपात 898 दर्ज किया गया था, जो 2020 में बढ़कर 933 हो गया। लेकिन तब से इसमें गिरावट आ रही है। 2021 में जहां 932 दर्ज किया गया, वहीं 2022 में यह गिरकर 929 और 2023 में 922 पर आ गया।
प्रमुख बिंदु
- – 2024 के दौरान पंजीकृत जन्मों की कुल संख्या 3,06,459 थी, जबकि 2023 के दौरान यह संख्या 3,15,087 थी।
— पंजीकृत कुल जन्मों में से 1,59,549 (52.06%) लड़के थे, जबकि 1,46,832 (47.91%) लड़किया थीं व 78 (0.03%) ट्रांसजेंडर या अस्पष्ट प्रकृति के बच्चे भी शामिल थे। - दिल्ली में प्रतिदिन जन्मों की औसत संख्या 2024 में 837 हो गई, जबकि 2023 में यह 863 थी।
- जन्म दर प्रति हजार जनसंख्या पर 14.00 रही, जबकि वर्ष 2023 में यह 14.66 थी।
- प्रति हजार जनसंख्या पर मृत्यु दर 2024 में 6.37 थी, जबकि 2023 में यह 6.16 थी।
- प्रति हजार जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर 2024 में 22.40 थी, जबकि 2023 में यह 23.61 थी।
- मातृ मृत्यु दर प्रति हजार पर 2024 में 0.44 थी जबकि 2023 में यह 0.45 थी।
- कुल जन्मों में से 2,94,464 (96.09%) अस्पतालों और 11,995 (3.91%) घर पर हुए थे।
- 2,94,464 संस्थागत जन्मों में से 1,91,727 (65.11%) जन्म सरकारी अस्पतालों में हुए।
- कुल जन्मों में से 11.90% जन्म ग्रामीण और 88.10% शहरी थे।
- प्रसव के समय मां की आयु 36.98% मामलों में यह 25-29 वर्ष थी, उसके बाद 27.11% मामलों में 20-24 वर्ष की आयु थी और 24.57% मामलों में मां की आयु 30-34 वर्ष थी। 2.57% मामलों में मां की आयु 19 वर्ष या उससे भी कम थी।
- कुल जन्मों में से 41.12 प्रतिशत मामलों में मां की शिक्षा का स्तर मैट्रिक लेकिन स्नातक से नीचे था और 16.70 प्रतिशत मामलों में माताएं निरक्षर थीं। उच्चतर शिक्षा के मामले में स्नातक या उससे ऊपर की योग्यता वाली माताओं की श्रेणी में जन्मों का अनुपात 9.63% था।

