भारतीय सिनेमा और थिएटर जगत में जब भी ‘जिंदादिली’ शब्द का जिक्र होगा, एक चेहरा आंखों के सामने खुद-ब-खुद तैर जाएगा—झुर्रियों से भरा मुस्कुराता चेहरा, आंखों में शरारत भरी चमक और सफेद बाल। जी हां हम बात कर रहे हैं उस अभिनेत्री के बारे में जिसने ‘दिल से’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘वीर जारा’ और ‘चीनी कम’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी का कमाल दिखाया था।
आम तौर पर हमारे समाज में उम्र बढ़ने के साथ ही इंसानी इच्छाओं, खासकर शारीरिक इच्छाओं और सेक्स (Sex) पर बात करना गुनाह मान लिया जाता है। लेकिन इस अभिनेत्री ने अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में इस रूढ़िवादी सोच की धज्जियां उड़ा कर रख दी थीं।
“97 की उम्र में जिंदादिली का राज
हम बात कर रहे हैं मशहूर फिल्म अभिनेत्री जोहरा सहगल के बारे में । यह किस्सा साल 2009 का है, जब जोहरा सहगल 97 साल की हो चुकी थीं। एक अखबार को दिए एक इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि इस उम्र में भी आपकी इस गजब की ऊर्जा और जिंदादिली का राज क्या है?
अक्सर इस उम्र में लोग योग, अध्यात्म या सादा खान-पान जैसे जवाब देते हैं, लेकिन जोहरा सहगल ने ठहाका लगाते हुए जो कहा, उसने इंटरव्यू ले रहे शख्स के होश उड़ा दिए। जोहरा आपा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया:
“ह्यूमर और सेक्स! जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए सेक्स बहुत जरूरी है; मुझे यह अब भी चाहिए!”
97 साल की एक बुजुर्ग महिला का सेक्स को लेकर यह नजरिया और ऐसा बिंदास कबूलनामा उस समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा था, जो बुजुर्गों को केवल ‘भजन-कीर्तन’ तक सीमित देखना चाहता है।
101 की उम्र में भी कायम रही वो ‘बगावत’
जोहरा सहगल की यह बेबाकी सिर्फ 97 साल की उम्र तक ही सीमित नहीं रही। अपनी मौत से महज एक साल पहले, यानी 2013 में जब वह 101 साल की थीं, तब उनसे पूछा गया कि उन्होंने जिंदगी में सबसे ज्यादा किस चीज का आनंद लिया? 101 साल की इस ‘बेगम बैलेरिना’ का जवाब फिर से वही था—“सेक्स! सेक्स! और सिर्फ सेक्स!” वह अपनी बढ़ती उम्र और ढलते शरीर को लेकर भी उतनी ही बेबाक थीं। उन्होंने हंसते हुए कहा था: “तुम मुझे अब देख रहे हो जब मैं बूढ़ी और बदसूरत हो गई हूं। तुमने मुझे तब देखा होता, जब मैं जवान और बदसूरत थी!”
समाज की बंदिशों से हमेशा की बगावत
एक पारंपरिक पठान परिवार में जन्मीं जोहरा सहगल ने पूरी जिंदगी अपने नियमों पर जी। 1930 के दशक में जब वह विदेश जा रही थीं, तो उन्होंने अपना सिल्क का बुर्का उतार फेंका और बाद में उससे अपने पेटीकोट सिलवा लिए। यही नहीं, उन्होंने अपने से 8 साल छोटे हिंदू लड़के (कामेश्वर सहगल) से शादी की, जिसके लिए उस दौर में भारी बवाल हुआ था।
वह मानती थीं कि जब तक आप अपनी पसंद का काम कर रहे हैं और आपके भीतर जिंदगी को जीने की चाह है, तब तक आपकी खूबसूरती और इच्छाएं कभी नहीं मर सकतीं।
उम्र को मात देने वाली ‘सदाबहार’ जोहरा
102 साल की उम्र में साल 2014 में इस दुनिया को अलविदा कहने वाली जोहरा सहगल ने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। सेक्स, रोमांस और इच्छाएं किसी उम्र की मोहताज नहीं होतीं। उनका यह नजरिया आज की पीढ़ी को भी यह सिखाता है कि समाज चाहे जो कहे, अपनी जिंदगी को पूरी शिद्दत और बिना किसी पछतावे (Guilt) के जीना चाहिए।
शायद इसीलिए जोहरा आपा अक्सर कहती थीं—“जिंदगी मुश्किल रही है, लेकिन मैं उससे ज्यादा सख्त रही हूं। मैंने जिंदगी को उसी के खेल में हरा दिया।”

