बागपत। राजपुर खामपुर गांव में 50 साल पहले बनाई गई मस्जिद अब गिराई जाएगी ।इसको लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति है। मुस्लिम पक्ष अब इस मामले में अपनी दलीलंे दे रहा है, लेकिन प्रशासन के सामने उनकी कोई भी दलील काम नहीं आ रही है। इसके बाद माना जा रहा है कि जल्दी ही इस मस्जिद को जमींदोज कर दिया जाएगा। आखिर क्यों इस पर कार्रवाई की जा रही है और क्या है मामला आइए जानते हैं।
असल में गांव के ही निवासी गुलशार ने इसकी शिकायत प्रशासन से की थी। उनका कहना था कि मस्जिद तालाब की जमीन पर कब्जा करके बनाई गई है। इसके बाद अफसर बदलते रहे और मस्जिद के नीचे तालाब की जमीन दबी रही। वहीं शिकायतकर्ता गुलशार का कहना है कि उसने गांव के तीन तालाबों पर कब्जे की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक पर हुई है।
पिछले पांच साल से गांव के तालाबों से अतिक्रमण हटवाकर जमीन कब्जामुक्त करने की मांग कर रहे गुलशार मलिक ने बताया कि उसे कई बार धमकियां भी दी गईं तो अफसरों ने अभद्रता भी की। बार.बार शिकायत करने के बाद भी राजस्व विभाग के अफसरों ने तालाब की जमीन से कब्जा नहीं हटवाया। अफसरों की कार्यशैली से परेशान होकर उसने उच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर कराई। जिस पर उच्च न्यायालय ने तालाबों से अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए।
इसके बाद हरकत में आए अफसरों ने वाद दर्ज कर सुनवाई शुरू की और नोटिस जारी कर मुतवल्ली से साक्ष्य भी मांगे। सुनवाई के बाद तहसीलदार ने तालाब से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। शिकायतकर्ता गुलशार ने बताया कि मस्जिद करीब 50 साल पुरानी है, जो काफी छोटी थी। वर्ष 2005 में आसपास की जमीन पर कब्जा करने के लिए चंदा इकट्ठा कर नींव रखी। इसके बाद कब्जा कर लिया गया।
गुलशार ने आरोप लगाया कि तालाब की जमीन पर मस्जिद के साथ कई मकान भी बने हुए हैं, जिनकी शिकायत भी की गई। मगर अफसरों ने गलत रिपोर्ट बनाकर भेज दी। बताया कि मस्जिद की जमीन के बाद भी 11 बीघा के तालाब का रकबा पूरा नहीं हो रहा, जो अभी भी तीन बीघा कम है। इसके लिए दोबारा शिकायत की जाएगी। यह भी आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय ने गांव के तीनों तालाबों से कब्जा हटवाने के आदेश दिए, लेकिन एक ही तालाब पर कार्रवाई की जा रही है।

