- राजकुमार दक्ष
आज यानी 25 मई से ‘नौतपा’ की शुरुआत हो गई है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही अगले 9 दिनों तक भीषण गर्मी और लू का दौर देखने को मिलेगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 2 जून तक उत्तर भारत के बड़े हिस्से के साथ उत्तराखंड में भी तापमान तेजी से बढ़ सकता है। खासतौर पर देहरादून और मैदानी इलाकों में लोगों को तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ेगा।
नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान में भारी बढ़ोतरी होती है। देहरादून में रविवार को अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार इस बार नौतपा के दौरान तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक रह सकता है। दोपहर के समय लू चलने की संभावना जताई गई है। हालांकि उत्तरकाशी और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर
डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बढ़ते तापमान से बिजली की खपत भी बढ़ेगी, जिससे कई क्षेत्रों में अघोषित कटौती की आशंका है। वहीं पानी की मांग बढ़ने से जल संकट भी गहरा सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग पर्याप्त पानी पीते रहें और दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें। नींबू पानी, छाछ, लस्सी और ओआरएस का सेवन फायदेमंद माना गया है। हल्के सूती कपड़े पहनें और सिर को टोपी या गमछे से ढककर रखें। तरबूज, खरबूजा और खीरे जैसे मौसमी फलों को डाइट में शामिल करने की भी सलाह दी गई है।
प्रसिद्ध कहावतें एवं उनका अर्थ
- “नौतपा जमकर तपे, तो सावन जमकर बरसे”
अगर नौतपा के इन 9 दिनों में जितनी भयंकर गर्मी और तपन होगी, मानसून के दौरान उतनी ही शानदार और भारी बारिश होगी। - “तपा नखत में जो चुइ जाय, सभी नखत फीके पड़ जाएं”
अगर रोहिणी नक्षत्र (नौतपा) के दिनों में बारिश की बूंदें गिर जाती हैं या मौसम ठंडा हो जाता है, तो आगे के सारे नक्षत्र फीके पड़ जाते हैं, यानी तब आगे मानसून में अच्छी बारिश नहीं होती और सूखा पड़ने के आसार बढ़ जाते हैं। - रोहिणी नक्षत्र और बारिश का संबंध
“रोहिनी तपे जो जेठ में, बड़खा होई सुकाल।”
अर्थ : यदि ज्येष्ठ मास में रोहिणी नक्षत्र के दौरान (यानी नौतपा में) खूब तेज धूप और तपन होती है, तो उस साल बहुत अच्छी वर्षा (सुकाल) होती है, जो फसलों के लिए अमृत समान मानी जाती है। - हवा के रुख से मानसून का अंदाजा
“नौतपा में जो बहै पुरवाई, तो जानो बरखा की घटी आई।”
अर्थ : नौतपा के दिनों में गर्म पछवा हवा चलना अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर इन 9 दिनों में ‘पुरवाई’ (पूर्व दिशा से आने वाली ठंडी या नमी वाली हवा) चलने लगे, तो यह संकेत है कि उस साल मानसून कमजोर रहेगा और बारिश में कमी आएगी। - गर्मी का फसलों पर असर
“जेठ न तपे तो सावन कूर, घाघ कहें हम होबय दूर।”
अर्थ : प्रसिद्ध लोक कवि घाघ कहते हैं कि यदि ज्येष्ठ (जेठ) के महीने में अच्छी तपिश और गर्मी नहीं पड़ी, तो सावन का महीना सूखा (कूर) निकल जाएगा। ऐसी स्थिति में अकाल की आशंका बढ़ जाती है। - टिड्डियों और बादलों का संकेत
“दिन को बादल, रात को तारा, नौतपा में ऐसा होय नजारा।
घाघ कहें तब जानियो भाई, अकाल की है नौबत आई।”
अर्थ : अगर नौतपा के दौरान दिन में बादल छाए रहें (जिससे तपन कम हो जाए) और रात को आसमान साफ रहे व तारे दिखें, तो मौसम का यह मिजाज अच्छा नहीं माना जाता। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में सूखा या अकाल पड़ सकता है। - उमस और चींटियों का इशारा
“तपे भूमि और निकले चींटी, तब समझो बरखा की आई चिट्ठी।”
अर्थ : जब नौतपा में धरती इतनी तप जाती है कि जमीन के नीचे रहने वाले कीड़े-मकोड़े और चींटियां अपने बिलों से बाहर आने लगती हैं, तो यह इस बात का पक्का संकेत होता है कि अब वायुमंडल में भारी उमस बढ़ चुकी है और जल्द ही झमाझम बारिश होने वाली है।

