मेरठ। कुख्यात शरद गोस्वामी एक बार फिर पुलिस के निशाने पर है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 10वीं फेल कैसे करोड़पति बन गया । उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें लगी हुई है। इतना ही नहीं पुलिस ने उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी रखा है।
शरद कभी मेरठ की सड़कों पर मोबाइल लूटता था। 2019 में जब पुलिस ने गिरफ्तार किया, तो एक करोड़ रुपये की कीमत के मोबाइल उसके फ्लैट से बरामद हुए थे। उसके बैंक खातों में 84 लाख रुपये तो एसएसपी मेरठ ने फ्रीज कराए थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शरद गोस्वामी आज दस करोड से अधिक की काली कमाई का मालिक बन बैठा है ।
पुलिस के अनुसार शरद गोस्वामी मेरठ के ब्रह्मपुरी का रहने वाला है। साल 2012 की बात है। शरद गोस्वामी अपने घर से आधा किमी की दूरी पर मेरठ के रेड लाइट एरिया ;कबाड़ी बाजार में आता.जाता था। यहीं से उसकी पहचान सेक्स रैकेट के लिए लिए कोठा संचालिकाओं से हो गई।
इसके बाद वह नेपाल और वेस्ट बंगाल से लड़कियों को मेरठ, नोएडा और दिल्ली में नौकरी दिलाने के लिए लाता था। फिर इन लड़कियों को कोठों पर बेच देता था। देह व्यापार का नेटवर्क चलाकर उसने खूब कमाई की।
शरद गोस्वामी ने मेरठ के मेट्रो प्लाजा में मोबाइल की दुकान में काम किया। यहीं से खुद का मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने लगा। जहां शरद ने अपनी गैंग में बाहरी युवकों को जोड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद वह खुद लोगों से मोबाइल छीनने लगा।
शरद अपने लैपटाप से आईएमईआई नंबर भी बदल देता है। मेरठ से लूटे हुए एक मोबाइल को पुलिस ने 2019 में नेपाल से बरामद किए। इस मोबाइल में भारत का सिमकार्ड थाए जिससे ट्रेस हो गया। इसके बाद शरद गैंग तक पुलिस पहुंची।
पुलिस के सर्विलांस एक्सपर्ट का कहना है की आईएमईआई नंबर बदलने के बाद मोबाइल ट्रेस नहीं हो पाता। ऐसे मोबाइल फोन का कोई भी गलत इस्तेमाल कर लेता है। राष्ट्र विरोधी व्यक्ति धमकी देनेए अपराध करने मे प्रयोग कर सकता है। गलत प्रयोग करने वाला आसानी से पकड़ में नहीं आता।
