बिजनौर। एसीजेएम (एमपी एमएलए कोर्ट) अभिनव यादव ने जमीन पर कब्जा करने के मामले में पूर्व गन्ना मंत्री और चांदपुर विधायक स्वामी ओमवेश को दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया है।
राजेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने एक बैनामा खसरा संख्या 726/1 और 726/2 मौजा निजाबतपुरा बीए का 16 सितंबर 2002 को कराया था। वह अपनी जमीन पर काबिज था। स्वामी ओमवेश जो उस समय सपा सरकार में गन्ना मंत्री थे। उन्होंने स्वयं खड़े होकर इस जमीन पर अपने चहेते देशपाल, अादित्य, विश्वेंद्र, विरेंद्र गौतम, राहुल, रामकुमार साहू के साथ कुछ अन्य आदमियों की मदद से 16 जून को 2005 को अवैध चिनाई करानी शुरू कर दी। वह स्टे की कॉपी लेकर जब वहां गया तो उसके साथ गाली गलौच की गई।
आदित्य ने उसे जान से मारने की नियत से उस पर फायर किया। वह थाना कोतवाली शहर गया। थाना प्रभारी ने उसे ही धमकाया और मामला स्वामी ओमवेश से जुड़ा होने के कारण चिनाई रूकवाने से मना कर दिया। डीएम, एसपी से शिकायत के बावजूद भी मामला राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश के प्रभाव के कारण इस मामले कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसकी जमीन जबरदस्ती चिन ली गई। बसपा सरकार बनने पर इस मामले में 2007 में रिपोर्ट दर्ज हुई। कोर्ट ने इस मामले में स्वामी ओमवेश, देशपाल, आदित्य, विरेंद्र, विश्वेंद्र, राहुल, रामकुमार के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए चार्जशीट दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमपी एमएलए के मामले शीघ्र निस्तारण किए जाने के तहत स्वमी ओमवेश की फाइल अन्य अभियुक्तों से अलग की गई। इस मामले में राजेंद्र सिंह, संसार सिंह, नरेंद्र, शेषपाल आदि गवाहों ने अपनी गवाहीं में स्वामी ओमवेश का नाम नहीं लिया। गवाहों का कहना था कि स्वामी ओमवेश मौके पर मौजूद नहीं थे। अदालत ने गवाहों के बयान व उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर इस मामले में संदेह का लाभ देते हुए स्वामी ओमवेश को बरी कर दिया गया। बाकी शेष अभियुक्तों के विरूद्ध अभी मुकदमा विचाराधीन है।

