मुज़फ्फरनगर। शुकतीर्थ दंडी आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी गुरुदेवेश्वर महाराज 91 ब्रहमलीन हो गए। आश्रम में अनुयायी और आसपास के लोग पहुंचे। उनके द्वारा किए गए सामाजिक और धार्मिक कार्यों को याद किया गया। आसपास के जिलों से भी अनुयायियों के पहुंचने का सिलसिला जारी। संत समाज के लोग पहुंचे। दोपहर के समय पीठाधीश्वर स्वामी गुरुदेवेश्वर महाराज को शुकतीर्थ में दी जाएगी समाधि। स्वामी गुरुदेवेश्वर महाराज जी लंबे समय से बीमार थे। साधु संत उन्हें समाधि देने की तैयारी कर रहे है।
2019 में संत महात्माओं के बीच संन्यास की विधिवत दीक्षा ली तो इनका दण्डी स्वामी गुरुदेवेश्वर महाराज नामकरण हुआ। दण्डी स्वामी का जन्म सम्भल जिले के गांव झिजोंडा में ब्राम्हण किसान दुर्गा प्रसाद के यहाँ हुआ था।
पांच भाइयो में यह चौथे नंबर के थे और परिवार ने गुरुदत्त नाम दिया था। बचपन से ही संत महात्माओं का सानिध्य व सेवा भाव को देख गांव के निकट हरि बाबा आश्रम में आना जाना रहने लगा। 12 वर्ष के स्वामी हरि बाबा के आशीर्वाद ले वृंदावन में जाकर भगवान की स्तुति में रम गए। स्वामी नारायण आश्रम महाराज का शिष्य बन दीक्षा प्राप्त की। इसके बाद देश के पौराणिक धार्मिक स्थानों को भ्रमण कर 65 वर्ष पूर्व शुकतीर्थ के दण्डी आश्रम पहुँच एस्वामी विष्णु आश्रम महाराज के सानिध्य में दण्डी आश्रम के जीर्णोद्धार में जीवन लगा दिया। सेवा भाव के चलते दण्डी आश्रम के पीठदीश्वर की जिम्मेवारी मिली।
गुरुदत्त महाराज ने गायत्री तपोनिष्ठ के रूप में विख्यात हुए। पांच बड़े यज जप किए। वही गांव झिजोंडा में माता गंगा देई व पिता दुर्गा प्रसाद के नाम विशाल शिव मंदिर सुंदर आश्रम का निर्माण कराया।
