पीएम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दी खेल विवि की सौगात, 700 करोड़ की लागत से मेरठ में बनेगा

pm modi

मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मेरठ में खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। सरथना तहसील के कैली गांव में करीब 700 करोड़ लागत से यह विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। इस मौके पर आयोजित रैली में जनसैलाब उमड़ आया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। इस मौके पर पीएम ने मेरठ में शहीद स्मारक पर भी पुष्प अर्पित किए। पीएम मोदी दिल्ली से मेरठ सड़क मार्ग से आए।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उन्होंने सभी को नए साल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत में मेरठ आना अपने आप में मेरे लिए बहुत अहम है। भारत के इतिहास में मेरठ का स्थान सिर्फ एक शहर का नहीं है बल्कि मेरठ हमारी संस्कृतिए हमारे सामर्थ्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। 

रामायण और महाभारत काल से लेकर जैन तीर्थंकरों और पंज प्यारों में से एक भाई धर्म सिंह तक मेरठ ने देश की आस्था को ऊर्जावान किया है। सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम तक इस क्षेत्र ने दुनिया को सिखाया है कि भारत का सामर्थ्य क्या होता है। 1857 में बाबा औघड़नाथ मंदिर से आजादी की ललकार उठी और दिल्ली कूच का जो एलान हुआए उसने गुलामी की अंधेरी सुरंग में देश को नई रोशनी दिखा दी। क्रांति की इसी प्रेरणा से आगे बढ़ते हुए हम आजाद हुए और गर्व से अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। मेरा सौभाग्य है कि यहां आने से पहले मुझे बाबा औघड़नाथ मंदिर जाने का अवसर मिला। मैं अमर जवान ज्योति भी गया। स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में उस अनुभूति को महसूस किया जो देश की आजादी के लिए कुछ कर गुजरने वालों के दिलों में लालायित थी।

मेरठ और आसपास के इस क्षेत्र ने स्वतंत्र भारत को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र रक्षा के लिए सीमा पर बलिदान हो या फिर खेल के मैदान में राष्ट के लिए सम्मान। राष्ट्र भक्ति की अलख को इस क्षेत्र ने सदा सर्वदा प्रज्वलित रखा है।

उन्होंने कहा नूरपुर मढैया ने चौधरी चरण सिंह के रूप में देश को एक विजनरी नेतृत्व दिया। मैं इस प्रेरणा स्थली का वंदन करता हूं। मेरठ क्षेत्र के लोगों का अभिनंदन करता हूं। मेरठ देश की एक और महान संतान मेजर ध्यानचंद जी की भी कर्मस्थली रहा है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम दद्दा के नाम पर कर दिया।

आज मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित की जा रही है। और किसी यूनिवर्सिटी का नाम मेजर ध्यानचंद जी से जुड़ जाता है तो उनका पराक्रम तो प्रेरणा देता है लेकिन उनके नाम में भी एक संदेश है। उनके नाम में जो शब्द है ध्यानए बिना ध्यान केंद्रित किएए बिना फोकस गतिविधि किए कभी भी सफलता नहीं मिलती है। इसलिए जिस यूनिवर्सिटी का नाम मेजर ध्यानचंद से जुड़ा हो वहां पूरे ध्यान से काम करने वाले नौजवान देश का नाम रोशन करेंगे। मैं उत्तर प्रदेश के नौजवानों को यूपी की पहली खेल यूनिवर्सिटी के लिए बहुत.बहुत बधाई देता हूं।

उन्होंने कहा 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह आधुनिक यूनिवर्सिटी दुनिया की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में से एक होगी। यहां युवाओं को खेलों से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं तो मिलेंगी ही खेल को कैरियर के रूप में अपनाने के लिए जरूरी स्किल का निर्माण भी होगा। यहां से हर साल 1000 से अधिक बेटे.बेटियां बेहतरीन खिलाड़ी बनकर निकलेंगे।

उन्होंने कहा अब हम 21वीं सदी में हैं और 21वीं सदी के नए भारत में सबसे बड़ा दायित्व हमारे युवाओं के पास है। इसलिए अब मंत्र बदल गया है। 21वीं सदी का तो मंत्र है जिस मार्ग पर युवा चल गए वही मार्ग देश का मार्ग है। जिधर युवाओं के कदम बढ़ जाएं मंजिल अपने आप कदम चूमने लगती है। नए भारत का आधार भी है युवाए नए भारत का विस्तार भी है। युवा नए भारत का नियंता भी है और युवा नए भारत का नेतृत्वकर्ता भी है। हमारे यहां के युवाओं के पास प्राचीनता की विरासत भी है आधुनिकता का बोध भी है। जिधर युवा चलेगा उधर भारत चलेगा। जिधर भारत चलेगा उधर अब दुनिया चलने वाली है।

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