बिजनौर। राजा दुष्यंत और शकुंतला की कहानी आप शायद ही भूले हों। उनका मिलन बिजनौर जिले में कण्व आश्रम के पास गंगा और मालन के संगम स्थल पर हुआ था। अब इस स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सोमवार को डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारियों ने इस स्थल पर खुद फावड़ा चलाकर खोदाई की। इससे पहले यहीं पर कण्व ऋषि प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र का हवन.यज्ञ करके शुभारंभ किया गया।
जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर रावली में मालन नदी गंगा में मिल रही है। इसी संगम के पास कण्व ऋषि आश्रम के नाम करीब दस हेक्टेयर जमीन है, जहां पर कुछ दिन पहले ही अधिकारियों ने कब्जा हटवाया था। सोमवार को डीएम उमेश मिश्रा, एसपी दिनेश सिंह, सीडीओ पूर्ण बोरा वहां पहुंचे और हवन.यज्ञ किया।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि यह भरत की जन्म स्थली, महश्रृषि कण्व की तपोस्थलि तथा दुष्यंत एवं शकुंतला की परिणय स्थली रही है। इस धरती में जन्म लेने वाले ग्राम प्रधानों को इस जगह को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण स्थल के रूप में विकसित और पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने में सहयोग करना चाहिए।
एसपी दिनेश सिंह ने कहा कि गाय के गोबर एवं मूत्र पर आधारित प्राकृतिक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यता है। प्राचीन काल में प्राकृतिक खेती का प्रचलन था, जो आज के युग में वातावरण को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धन के लिए और अधिक हो गया। प्रासांगिक, प्राकृतिक खेती प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने का प्रयास क्रांतिकारी कदम होगा। इसके बाद अधिकारियों ने कण्व ऋषि अमृत सरोवर की नींव के लिए फावड़ा चलाकर खोदाई की।
इस मौके पर डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि शास्त्रों में इस जगह को नर.नारायण की भूमि कहा गया है। इस जगह को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। लोग यहां पर प्रशिक्षण लेने आएंगे, वहीं इस जगह की महत्ता को भी समझेंगे।

