आतंकियों के डर से छिपकर से जीने को मजबूर महिला जज, तालिबानियों के खिलाफ फैसले सुनाने की मिल रही सजा

नई दिल्ली। कभी तालिबानियों के खिलाफ फैसले सुनाने वाली अफगान महिला जजों को इन दिनों अपनी जान बचाते फिरना पड़ रहा है। महिला अभियोजकों का कहना है कि कई पूर्व तालिबानी कैदी बदला लेने के लिए कब्जे के बाद से उन्हें बार-बार अज्ञात नंबरों से फोन कॉल आ रही हैं, जिससे वे भयभीत हैं।

पता चला है कि कई महिला जज भागकर विदेश चली गई हैं, लेकिन सैकड़ों अब भी देश में ही छिप-छिपकर जी रही हैं और उन्हें हर वक्त जान का खतरा रहता है। इन महिला जजों ने आमतौर पर महिला अधिकारों के उल्लंघन, महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म, हत्या और पारिवारिक उत्पीड़न के मामलों पर फैसले सुनाए थे।

खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने बताया, अन्य महिला कर्मचारियों की तरह ही महिला अभियोजक भी अपने घरों में ही कैद हैं।

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